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आज, मुझसे शादी करोगी

इस चिट्ठी में डगलस ऐडम्स् की पुस्तक 'द हिचहाइकरस् गाइड टू द गैलैक्सी' की चर्चा के साथ आज की तारीख का सम्बन्ध बताया गया है।
'उन्मुक्त जी, शादी की शुभकामनायें।'
अरे भाई, घर से निकलवाइयेगा क्या।  मैं थोड़ी शादी करने जा रहा हूं पर आज बहुत से लोग शादी कर रहे हैं।
'उन्मुक्त जी, ऐसा क्या खास है आज के दिन।' 
कुछ जगहों में, कुछ समुदायों में, इतवार के दिन ही शादी की जाती है। पिछले साल इतवार ११ अक्टूबर को था। इस साल यह आज दस तारीख को है। लेकिन इस साल इतवार में शादी करने वाले लोग लगभग तीन गुने हैं। इसमें बहुत से कंप्यूटर और विज्ञान से जुड़े लोग भी हैं। और आज का दिन उनके लिये खास है। 
'उन्मुक्त जी, होगा क्या। यह लोग अंक विद्या में विश्वास करते होंगे। उसके हिसाब से आज का दिन शुभ होगा बस। लेकिन आपने ४२ संख्या क्यों लिख रखी है?'
मेरे विचार से अंक विद्या में कोई तथ्य नहीं। यह केवल अन्धविश्वास है - टोने टुटके की तरह। कंप्युटर या विज्ञान से संबन्धित लोग इस पर विश्वास नहीं करते हैं। लेकिन इसका कारण कुछ और है जिसका संबन्ध ४२ से है। 
'अरे, तो फिर जल्दी बताईये वह क्या है?'
सब्र कीजिये। इस संख्या का महत्व तो  आपको इस चिट्ठी के अन्त में पता चलेगा। पहले कुछ बाते अंक विद्या के बारे में। 

मैंने अपनी श्रृंखला 'ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके' लिखते समय, दो चिट्ठियां  अंक विद्या, डैमियन - शैतान का बच्चा लिख कर उस फिल्म-श्रृंखला की चर्चा की थी जिसमें इस अंक विद्या को महत्व दिया गया था। इसके बाद इसकी कड़ी अंक लिखने का इतिहास में, इसके गलत तरीके से विकास और लोकप्रिय होने का कारण बताया था। यदि आप इसे पढ़ेंगे तो पायेंगे कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है।

इस श्रृंखला को मैंने एक जगह सम्पादित कर लेख चिट्ठे ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके नाम की चिट्ठी पर रखा है। इस पर मुझे अक्सर सीमा के बाहर टिप्पणियां भी झेलनी पड़ती हैं। अंततः मैंने दो अन्य चिट्ठियां, ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके, श्रृंखला किसी को दुख देने के लिये नहीं लिखी तथा ज्योतिष, और अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ श्रृंखला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिये लिखी, लिख कर बताया कि मैंने यह श्रृंखला क्यों लिखीं थी लेकिन मेरे लेख चिट्ठे पर अभद्र टिप्पणियों का आना बन्द नहीं हुआ।

यह  चिट्ठी भी, मैंने किसी को दुख देने के लिये नहीं, लेकिन एक प्रसिद्ध विज्ञान कहानी संग्रह और उसका आज की तारीख से संबन्ध बताने के लिये लिखी है।

आज तारीख है १०.१०.१० - यह कुछ असमान्य सी तारीख है। जैसे २००९ की ९ सितंबर (०९०९०९) या २००८ की ८ अगस्त (०८०८०८)। बस इसलिये यह कुछ अजीबो-गरीब है।
'उन्मुक्त जी, क्या बस इसीलिये कंप्यूटर और विज्ञान वाले इस दिन शादी कर रहे हैं।'
नहीं, इसका कारण कुछ और ही है।

मैंने कुछ समय पहले 'नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू’ नामक श्रृंखला कई कड़ियों में प्रकाशित की। इसके बाद इसे सम्पादित कर २ की पॉवर के अंक, पहेलियां, और कमप्यूटर विज्ञान नाम से लेख चिट्ठे पर रखा। इसकी भूमिका और २ की पावर और कंप्यूटर विज्ञान और श्रृंखला का निष्कर्ष में बाईनरी सिस्टम की चर्चा की है। 

कंप्यूटर बाईनरी सिस्टम ही समझते हैं। यदि आज की तारीख १०१०१० को हम बाईनरी सिस्टम में लिखा माने और उसे डेसीमल सिस्टम, जिसमें हम काम करते हैं, में बदलें, तो यह २^५+०+२^३+०+२^१+० यानि कि ४२ के बराबर होगा। यहां ^ का अर्थ है पॉवर। २^५ का मतलब हुआ २ की पॉवर ५ यानी २x२x२x२x२ या ३२
'उन्मुक्त जी, आपको कुछ नहीं मालुम। अंक विद्या के अनुसार ४२ संख्या तो ६ के बराबर है। यह अंक महत्वपूर्ण है। इसी लिये यह लोग आज शादी कर रहें हैं, ठीक है न।'
डगलस ऐडम्स्
यह सच नहीं है। यह संख्या (४२) विज्ञान कहानी प्रेमियों के लिये महत्वपूर्ण है। उनके लिये यह खास नम्बर है।

डगलस ऐडम्स् एक अंग्रेजी लेखक हैं। १९७८ में उन्होंने बीबीसी की चैनल-४ में रेडियो प्रोग्राम की श्रृंखला की थी। बाद में वह पुस्तकों के रूप में लिखी गयीं। उन्होंने ५ पुस्तकें लिखीं थीं। छटवीं लिखने के पहले उनकी मृत्यु हो गयी। बाद में छटी पुस्तक ओवेन कोल्फर ने लिखी। 

पहले प्रकाशन पर पुस्तक का कवर
विज्ञान कहानियों की यह श्रृंखला, 'द हिचहाइकरस् गाइड टू द गैलैक्सी' के नाम से जानी जाती है। यह बाद में एच२जी२ (H2g2) के नाम से भी प्रसिद्ध है। १९८१ में इस पर टीवी श्रृंखला और डीसी कॉमिक्स ने पहली तीन उपन्यास में कॉमिक्स भी निकाली।

क्या आप जानते हैं कि इसकी सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति  क्या है। नहीं मालुम न, चलिये मैं बताता हूं। 
 
इसके प्रथम उपन्यास में, ब्रह्माण्ड के अत्यंत बुद्धिमान प्राणीगण जीवन का क्या मतलब है जानने के लिये अपने दो सबसे प्रबुद्ध प्राणियों को सुपर कंप्यूटर से अंतिम सवाल का, आखरी जवाब जानना के लिये नियुक्त करते हैं। कंप्यूटर उन्हें, ७५ लाख साल के बाद आने को कहता है। उस समय उसका जवाब होता है - ४२।  
'उन्मुक्त जी, समझ में नहीं आया। वह आखरी सवाल क्या था। जिसका जवाब ४२ था।'
वह सवाल क्या था यह किसी को नहीं मालुम, बस जवाब ही मालुम है :-) 
पहली कॉमिक का कवर

जब सुपर कंप्यूटर से पूछा जाता है कि आखरी सवाल क्या था, तब वह बताता है कि उसे उसका सवाल नहीं मालुम। लेकिन वह उससे भी अधिक शक्तिशाली कंप्यूटर (पृथ्वी) को बना सकता है। जिसके पास इसका जवाब हो। उसमें उन सब को, आदि-प्राणी की तरह जाना होगा। एक करोड़ साल बाद उसका जवाब मिल सकेगा। लेकिन जब उसका जवाब मिलने की बात होती है तब उसके ठीक ५ मिनट पहले पृथ्वी नष्ट हो जाती है।

वास्तव में, यह संख्या ४२ मज़ाक ही है। लेकिन इसे इस तरह देखें कि जिस दिन हमें आखरी सवाल और उसका जवाब मालुम चल जायगा। उस दिन हम इस ब्रह्माणड को जान लेंगे। फिर जीने का उद्देश्य ही समाप्त हो जायगा। वह जीवन का अन्त होगा।
'उन्मुक्त जी, कहानी तो कुछ रोचक लग रही है। क्या कुछ और प्रकाश डालेंगें।' 
आपको ही नहीं, यह बहुतों को रोचक लगती है। यही कारण है कि यह बीसवीं शताब्दी के अन्तिम चतुर्थांश की सबसे प्रसिद्ध विज्ञान कहानियों में से है। इसी लिये ४२ संख्या बहुत से विज्ञान कहानी प्रेमियों को भाती है। यही कारण है कि वे लोग इस दिन शादी कर रहे हैं। जहां तक इसकी कहानी की बात है वह तो अरविन्द मिश्रा जी से ही पूछिये। याहू पर साइंस फिक्शन ग्रुप वह चलातें हैं कि मैं :-)  

न तो मैं आज शादी कर रहा हूं न ही मेरी शादी आज हुई थी। मेरी शादी को तो जमाना गुजर गया। आज मेरी एक प्रिय भान्जी का जन्मदिन है। मैंने उसी के लिये यह चिट्ठी लिखी है।

इस पर फिल्म भी बनी यदि आप इसका वह भाग देखना चाहते हों, जहां पर कंप्यूटर सवाल का जवाब दे रहा है
तब नीचे देखें।
सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।:
Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. his will take you to the page where file is. Click where ‘Download’ and there after name of the file is written.)
यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने'

About this post in Hindi-Roman and English  
is chitthi mein Douglas Adams kee likhi pustak  'The Hitchhiker's Guide to the Galaxy' kee charchaa ke saath aaj ke tareekh ke smbandh ke sameeksha hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post is book review of 'The Hitchhiker's Guide to the Galaxy' by Douglas Adams talks about its connection with today's date. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. 

सांकेतिक शब्द
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भाषायें लुप्त हो जाती हैं - गणित के सिद्घान्त नहीं

इस चिट्ठी में, एयोस्टोलोस डॉक्सिएडिस द्वारा लिखित उपन्यास, 'अंकल पेट्रोस एण्ड गोल्डबाकस् कंजेक्चर' की चर्चा है।
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, 'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने' देखें।


गोल्डबाक  १८वीं शताब्दी के गणितज्ञ थे। ७ जून १७४२ को उन्होंने जर्मन गणितज्ञ ल्योन्हार्ड ऑयला को पत्र लिखा कि उन्होंने यह पाया है कि दो से बड़ी, दो से विभाज्य होने वाली संख्या (even number), हमेशा दो अभाज्य संख्या (Prime) का जोड़ है। अब इसे उन्हीं के नाम पर, गोल्डबाक  अनुमान के नाम से जाना जाता है। यह नम्बर थ्योरी की सबसे पुराने अनुत्तरित प्रश्नों में से है। यह न तो अभी तक सही और न ही गलत सिद्घ हो पाया है।


उपन्यास 'अंकल पेट्रोस एण्ड गोल्डबाकस् कंजेक्च' की कहानी, गोल्डबाक अनुमान और कोर्ट गर्डल के अपूर्णनता सिद्घान्त के इर्द गिर्द घूमती है। यह मूलत: १९९२ में ग्रीक भाषा में लिखा उपन्यास है। वर्ष २००० में, इसे  फेबर एण्ड फेबर द्वारा अंग्रेजी में प्रकाशित किया गया। इसके प्रकाशकों ने इसकी बिक्री बढाने के लिये १० लाख डालर का पुरस्कार देने कि घोषणा की जो  इस पुस्तक के प्रकाशित होने के दो साल के अन्दर गोल्डबाक अनुमान को सही या गलत सिद्घ करे दे। यह बताने के जरूरत नहीं है कि कोई भी इस पुरस्कार को नहीं जीत सका।

यह कहानी है एक चाचा और भतीजे की। चाचा को उसके परिवार के लोग नाकामयाब व्यक्ति मानते हैं। चाचा अकेले रहना पसन्द करते हैं, किसी से मिलते नहीं हैं। भतीजे ने गणित में शिक्षा ली है और उसे पता चलता है कि उसके चाचा विलक्षण प्रतिभा के युवक थे। बाद में वे विश्वविद्यालय में सबसे कम उम्र में गणित के प्रोफेसर बने और लोग उनको इज्जत और सम्मान से देखते हैं। फिर ऎसा क्या हो गया कि उसके परिवार वाले उन्हें नाकामयाब मानते हैं।
चाचा, गोल्डबाक अनुमान को सिद्ध करना चाहते हैं और इसी में जीवन लगा देते हैं। लेकिन यह तो अनुत्तरित प्रश्न ही रहा। यही इसकी कहानी है जो कि गणित की लघुकथायें, किस्से, और घटनायें पर बुनी हैं। यह कहानी तो काल्पनिक है पर उसमें लिखी लघुकथायें, किस्से, और घटनायें सच हैं। यह बेहद रोचक पुस्तक है और गणित जैसे नीरस विषय पर रोमांच पैदा करती है। यह पुस्तक जी. एच. हार्डी की उत्कृष्ट रचना 'ए मैथमैटीशियनस् अपॉलोजी' के इस उद्घारण से शुरू होती है।
'Archimedes will be remembered when Aeschylus is forgotten because languages die and Mathematical ideas do not. Immortality may be a silly word but properly a mathematician  has the best chance of whatever it may mean'
लोग एस्काइलस् (ग्रीक नाटककार) को भूल जायेंगे पर आर्कमडीज़ को हमेशा याद रखेंगे।  क्योंकि, भाषायें लुप्त हो जाती हैं लेकिन गणित के सिद्घान्त समाप्त नहीं होते हैं। शायद अमरत्व बेवकूफी है। लेकिन यह जो कुछ भी है उसे पाने के लिये गणितज्ञ की ही संभावना सबसे अधिक है।
नम्बरों की बात हो और रामानुजम की बात न हो—यह तो हो नहीं सकता। इस पुस्तक में रामानुजम की भी चर्चा है और हार्डी-रामनुजम के टैक्सी नम्बर किस्से की भी।
इस पुस्तक में गर्डल के अपूर्णनता का सिद्घान्त का भी प्रयोग है लेकिन यह कैसे है और इस कहानी का क्या अंत है यह तो मैं आपको बताने से रहा। आपका इस पुस्तक को पढ़ने का रोमांच समाप्त कर,  मैं आपका मजा थोड़े ही किरकिरा करना चाहता हूं। आप इस पुस्तक को पढ़ें और आनन्द लें। यह आपको आसानी से समझ में आयेगी। अपने बेटे और बेटियों को अवश्य पढ़ने के लिये दें।

मैंने इस श्रंखला की भूमिका में, इंडिपैंडेंटस डे (Independence day) फिल्म का चित्र प्रयोग किया था। उसका साईबर अपराध से कैसे संबन्ध है यह अगली बार।

जी. एच. हार्डी (GH Hardy) की पुस्तक 'ए मैथमैटीशियनस् अपॉलोजी'  (A Mathematician's Apology) उत्कृष्ट रचना मानी जाती है। यदि आपने इसे नहीं पढ़ा है तो अवश्य पढ़ें। यह अन्तरजाल पर यहां पर उपलब्ध है। 
 
तू डाल डाल, मैं पात पात
 

About this post in Hindi-Roman and English  is chitthi mein Apostolos Doxiadis kee likhi pustak  'Uncle Petros and  Goldbach's Conjecture,' kee sameeksha hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.
This post is book review of 'Uncle Petros and  Goldbach's Conjecture,' by Apostolos Doxiadis. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. 

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क्या कंप्यूटर व्यक्तियों की जगह ले सकते हैं

इस चिट्ठी में, रॉजर पेनरोज़ के द्वारा लिखी 'द एमपररस् न्यू माइण्ड: कंसर्निग कंप्यूटरस्‌, माइण्डस् एण्ड द लॉज़ ऑफ फिज़िक्स' पुस्तक की समीक्षा है। 
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, 'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने' देखें।
रॉजर पेनरोज़ अंग्रेज गणित-भौतिक शास्त्री हैं। आपने 'द एमपररस् न्यू माइण्ड: कंसर्निग कंप्यूटरस्‌, माइण्डस् एण्ड द लॉज़ ऑफ फिज़िक्स' नामक बेहतरीन पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक में मुख्य तौर पर यह बताने की कोशिश की गयी है कि कंप्यूटर कभी भी व्यक्तियों की जगह नहीं ले सकता हैं।

गणीतीय तर्क शास्त्र अलगोरिथम  पर आधारित है। यह गर्डल के अपूर्णनता सिद्धान्त से बंधा है। पेनरोज़ का मानना है कि मानव चेतना  ग़ैर-अलगोरिथमी (non-algorithmic) है।  यही कारण है कि इसे कभी भी गणीतीय तर्क शास्त्र पर आधारित डिज़िटल कंप्यूटर से नहीं बदला जा सकता है।

पेनरोज़, इस पुस्तक में पुस्तक में, न्यूटन के भौतिक शास्त्र, आइंस्टाइन के सापेक्षता सिद्धान्त  (special and general relativity), क्वांटम भौतिक शास्त्र (quantum physics), ब्रह्माण्ड विज्ञान (cosmology), समय की प्रकृति (nature of time) और गणित का दर्शन एवं उसकी सीमा (the philosophy and limitations of mathematics), की चर्चा करते हुऐ अपनी बात रखते हैं।

यह पुस्तक भौतक शास्त्र का एक विहंगम दृश्य (bird's eye view) दिखाता है और इस विषय के बारे में रोचक तरीके से सूचना देता है।

यह  बेहतरीन पुस्तक है और उत्कृष्ट पुस्तकों में से एक हैं।   इस पुस्तकों को समझने के लिए कम से कम  इण्टरमीडिएट या स्नातक स्तर के भौतिक शास्त्र का ज्ञान जरूरी  है और तभी यह पढ़ने पर अच्छी तरह से समझ में आ सकेगी।  यदि आप विज्ञान के छात्र है या विज्ञान में आगे कुछ कार्य करना चाहते है। या आपके बेटे, बेटियां इन क्षेत्रों में काम करना चाहती है तब उन्हें यह पुस्तक पढ़ने के लिए अवश्य दें।

ऐलेन मैथिसॉन ट्यूरिंग (२३.६.१९१२ से ७.६.१९५४) अंग्रेज गणितज्ञ, तर्क शास्त्री, गूढ़लेखिकी विशेषज्ञ (cryptanalyst) एवं कंप्यूटर विज्ञानिक थे। कंप्युटर विज्ञान  और अलगोरिथम (algorithm) को रूप देने और आधुनिक कंप्यूटर के निर्माण में अग्रणी थे।
बीबीसी की डेंजरस् नॉलेज (Dangerous Knowledge) श्रृंखला का जिक्र मैंने अपनी चिट्ठी 'नाई महिला है' में किया था। यह श्रृंखला चार विलक्षण प्रतिभा के व्यक्ति, जिसमें तीन गणितज्ञ- जॉर्ज कैंटर, कोर्ट गर्डल, और ऐलन ट्यूरिंग  - और एक भौतिक शास्त्री लुडविंग बॉल्टज़मैन पर थी। उस चिट्ठी में, श्रृंखला का वह भाग भी दिखाया था जिसमें गर्डल के शुरू के जीवन के बारे में है। उसके बाद एवं ट्यूरिंग के जीवन के बारे में यहां देखिये। इसमें ट्यूरिंग गर्डल के अपूर्णता सिद्धान्त को कंप्यूटर के क्षेत्र में लागू करते समय भी यह कहते हैं कि कुछ सवाल ऐसे भी हैं जिन्हें कंप्यूटर के द्वारा हल नहीं निकाला जा सकता है।

'उन्मुक्त जी, हमें तो घबराहट हो रही है। लगता है कि जिन पुस्तकों की आपने चर्चा की है वे सारी कठिन हैं। क्या गणित और अपूर्णता के सिद्धान्त के बारे में कोई आसान पुस्तक है?'
है तो।

इन्दू जी गणित की अध्यापिका हैं। उनके चिट्ठे का नाम उनकी पुत्री के नाम 'पार्थवी' पर है। उस चिट्ठे पर वे गणित और उसकी पहेलियां पर चर्चा करती हैंमुझे आपका चिट्ठा अच्छा लगता है। 

कुछ समय पहले उन्होंने 'गणित की वो समस्याये : जिन्हें कोई हल ना कर सका --१' लिखते समय गोल्डबाख अनुमान की चर्चा की थी। उस समय मुझसे इसके बारे में लिखने के लिये कहा था। ऊपर जिस आसान पुस्तक का मैंने जिक्र किया है वह गोल्डबाख अनुमान और गर्डल के सिद्धान्त से सम्बंधित है। 

इन्दू जी की अनुरोध पर, उसकी चर्चा इस श्रंखला की अगली कड़ी में।
तू डाल डाल, मैं पात पात
भूमिका।। नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है।। नाई, महिला है।। मिस्टर व्हाई - यह कौन हैं।। गणित, चित्रकारी, संगीत - क्या कोई संबन्ध है।। क्या कंप्यूटर व्यक्तियों की जगह ले सकते हैं।।
 

About this post in Hindi-Roman and English  is chitthi mein roger penrose kee likhi pustak  'The Emperor's New Mind: Concerning Computers, Minds and The Laws of Physics' kee sameeksha hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.
This post is book review of The Emperor's New Mind: Concerning Computers, Minds and The Laws of Physics' by Roger Penrose. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. 
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गणित, चित्रकारी, संगीत - क्या कोई संबन्ध है

इस चिट्ठी में, गर्डल से संबन्धित तीसरी पुस्तक, 'गर्डल, ऍशर, बाख: एन ईटनल गोल्डेन ब्रेड' की चर्चा है। इसके लेखक हैं - डगलस आर हॉफेस्टैडर।
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, 'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने' देखें।
'गर्डल, ऍशर, बाख: एन ईटनल गोल्डेन ब्रेड' पुस्तक १९७९ में छपी थी।  मैंने तभी इसे पढ़ा था। 

गर्डल तर्कशास्त्री, एम सी ऍशर (MC Eshcher) (१७ जून १८९८ – २७ मार्च १९७२) चित्रकार, और योहन सेबेस्टियन बाख (Johann Sebastian Bach) (३१ मार्च – २८ जुलाई १७५०) एक जाने माने संगीतज्ञ थे।
ड्रॉइंग हैण्डस् १९६१ चित्र विकिपीडिया से
  • गर्डल का मुख्य काम  स्वयं को संर्दभित करने वाले विरोधाभास के बारे में था।
  • ऍशर की चित्रकारी एकदम अलग तरह से है। इनके बहुत से चित्र वापस वहीं पहुंचते हैं जहां से वे शुरू होते हैं। इनमें से कई एक तरह से स्वयं को संदर्भित करते हैं। उनके दो प्रसिद्ध चित्र देखिये पहले में एक हाथ दूसरे हाथ को बना रहे है और दूसरा हाथ पहले को। दूसरे में (नीचे देखें), पानी का झरना ऊपर से नीचे गिर कर वहीं पहुंच रहा है।
  • बाख ने बहुत कुछ ऐसे संगीत को जन्म दिया जिसमें पुनरावृत्ति होती है।
वॉटरफॉल १९६१ चित्र विकिपीडिया से
यह पुस्तक इन तीनों के सम्बंधो को जोड़ती है और उनके समन्वय के बारे में चर्चा करती है। इसमें मुख्यतः गर्डल के अपूर्णता सिद्धान्त की चर्चा है। यह गणित (mathematics), सममिति (symmetry) और प्रतिभा (intelligence) के  मूलभूत अवधारणा की गूढ़ व्याख्या करते हुऐ यह  हुई यह बताने का प्रयत्न करती है कि किस प्रकार निर्जीव वस्तुओं से जीवन्त पदार्थ निर्मित हो सकता है।

यह पुस्तक एकदम अलग तरीके से लिखी गयी है। इस पुस्तक में एक अध्याय जनरल है। इस अध्याय में, गर्डल की गणित, ऍशर की चित्रकारी एवं बाख के संगीत को  ऍक्लीस (Achilles), कछुआ (Tortoise), और केकड़ा (Crab) की बातचीत के द्वारा बताया गया है। तथा अगले अध्याय मे उसी विचार को गणित के द्वारा बताया गया है। इसमें गणित से सम्बन्धित अध्याय को समझने  के लिए जरूरी है कि आपको मार्डन एलजेबरा आता हो।
 
यह उत्कृष्ट पुस्तकों में से एक हैं।   इन पुस्तकों को समझने के लिए कम से कम  इण्टरमीडिएट या स्नातक स्तर की गणित का ज्ञान जरूरी  है और तभी यह पढ़ने पर अच्छी तरह से समझ में आ सकेगी।  यदि आप गणित या कंप्यूटर विज्ञान, या कृत्रिम बुद्धि (Artificial intelligence), सोचने वाली मशीन (Thinking machines), या जटिलता (complexity) जैसे विषय पर रुचि रखते हैं या इस  क्षेत्र में काम करना चाहते हैं  या आपके बेटे, बेटियां इण्टरमीडिएट या स्नातक स्तर पर गणित तथा विज्ञान  के क्षात्र हैं और इन विषयों पर आगे काम करना चाहते हैं तब उन्हें यह पुस्तक अवश्य पढ़ने के लिए दें।

बाख के इस तरह के संगीत का आनन्द लीजिये।

तू डाल डाल, मैं पात पात
भूमिका।। नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है।। नाई, महिला है।। मिस्टर व्हाई - यह कौन हैं।। गणित, चित्रकारी, संगीत - क्या कोई संबन्ध है।। क्या कंप्यूटर व्यक्तियों की जगह ले लेंगे।।


About this post in Hindi-Roman and Englishis chitthi mein Douglas R Hofstadter ke dvara likhi pustak 'Godel Escher, Bach An Eternal Golden Braid' kee charcha hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.
This post is book review of 'Godel Escher, Bach An Eternal Golden Braid' by Douglas R Hofstadter. part of series on Cyber crimes. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
। Kurt Gödel, Incompleteness theorems, Artificial intelligence, Godel Escher, Bach: An Eternal Golden Braid, Douglas R Hofstadter, MC Escher, Johann Sebastian Bach,
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मिस्टर व्हाई - यह कौन हैं

'कोर्ट गर्डल, महानतम तर्क शास्त्री माने जाते हैं। इस चिट्ठी में,  उनकी जीवनी और उस पर लिखी दो पुस्तकों की चर्चा है। 
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने'
देखें।
कोर्ट गर्डल पर बहुत सी पुस्तकें लिखी गयी हैं। इनमें से मैंने निम्न चार पुस्तकें पढ़ी हैं:
  1. Gödel: A life of Logic by John L Casti (गर्डल: ए लाइफ ऑफ लॉज़िक लेखक जॉन एल कास्टी)
  2. A world Without Time: The forgotten legacy of Gödel and Einstein by Polle Yourgrau (ए वर्ल्ड विथआउट टाइम: द फॉरगॉटन लेगसी ऑफ गर्डल एंड आइंस्टाइन लेखक पॉले योरग्रॉ)
  3. Gödel, Escher, Bach: An Eternal Golden Braid by Douglas R. Hofstadter (गर्डल, ऍशर, बाख: एन ईटर्नल गोल्डेन ब्रेड लेखक डगलस आर हॉफस्टैडर)
  4. The Emperor's New Mind: Concerning Computers, Minds and The Laws of Physics (द एमपररस् न्यू माइंड: कंसर्निग कंप्यूटरस्‌, माइंडस् एण्ड द लॉज़ ऑफ फिज़िक्स  लेखक रॉजर पेनरोज)
आज हम पहली दो पुस्तकों के बारे में बात करेंगे।

गर्डल जिज्ञासू थे और वह मिस्टर व्हाई (Mr. Why) के नाम से जाने जाते थे। वे असामान्य प्रतिभा के धनी थे। वे एक शर्मीले युवक से एक ऎसे व्यक्ति बन गये जिनके साथ अधिकतर लोग रहना पसंद करते थे। लेकिन जीवन के अन्त में वे फिर अकेलेपन में डूब गये।

गर्डल ने ऍडेले (Adele) नामक एक तलाकशुदा महिला से शादी की। वह उनसे ६ साल की बड़ी थी और  कैबरे  (Cabaret) नृत्य करती थी। यह शादी उनके माता पिता को पसंद नहीं थी इसलिए गर्डल को शादी के लिए १० साल इन्तजार करना पड़ा। उनके कोई सन्तान नहीं हुई।

कोर्ट गर्डल और अर्लबट आइंस्टाइन पिछले शताब्दी के दो महानतम वैज्ञानिक थे। जीवन के अंतिम दिनो में, वे दोनो ही   इंस्टीट्यूट आफ एडवांसड स्टडीज़ (Institute of Advance Studies Princeton) चले गये थे। दोनो का स्वभाव एक दूसरे के विपरीत था। गर्डल थोड़ा निराशवादी और परेशान दार्शनिक  और  आइंस्टाइन मुक्त भावुक व्यक्ति थे।  लेकिन उन दोनों को एक दूसरे से शान्ति मिलती थी।  आइंस्टाइन  का कहना था कि,

'इंस्टीट्यूट आफ एडवांसड स्टडीज़ में सबसे अच्छी बात यह है कि, इंस्टिच्यूट से वापस घर जाते समय, गर्डल और मेरा साथ रहता है।'
फ्रीमैन डाइसन जाने माने भौतिक शास्त्री हैं। वे इंस्टीट्यूट आफ एडवांसड स्टडीज़ के स्दस्य हैं। उनका कहना है कि,
'Gödel was … the only one of our colleagues who walked and talked on equal terms with Einstein.'
हमारे साथ के लोगों में, केवल गर्डल ही था जो आइंस्टाइन के साथ चल सकता था और उनसे बराबरी पर बात कर सकता था।
गर्डल कुछ अजीब किस्म के व्यक्ति थे। उन्होंने अन्त में आत्महत्या कर ली। उनका आत्महत्या का तरीका भी एकदम अलग अपने अपूर्णनता सिद्धान्त की तरह। उनकी मृत्यु malnutrition के कारण हो गयी। वे जीवन के अन्त में अस्पताल में unitary tract की समस्या के लिये भरती थे। उन्होंने महीने भर खाना नहीं खाया। उनका कहना था कि डाक्टर उन्हें जहर दे कर मारना चाहते हैं।

इन दोनो पुस्तकों में गर्डल के बारे पर्याप्त सूचना है।  दूसरी पुस्तक में आइंस्टाइन के संबन्ध में भी कुछ सूचना है।

पहली पुस्तक में कुछ अध्याय, कृत्रिम बुद्धि (Artificial intelligence), सोचने वाली मशीन (Thinking machines), और जटिलता (complexity) के बारे में है। इसे उन लोगों के लिए समझना मुश्किल है जो विषय पर रूचि नही रखते है या जिनको इस क्षेत्र में कोई ज्ञान नहीं है। इसलिए यदि आप चाहें तो इन अध्याय को छोड़ सकते है पर यदि आपको तर्कशास्त्र या कम्पयूटर विज्ञान में रूचि है तब इन अध्यायों को अवश्य पढ़ें। बाकी अध्याय आसान हैं व आसानी से समझे जा सकते है।

दूसरी पुस्तक में, कुछ अध्याय गर्डल द्वारा समय के ऊपर किये गये काम के बारे में है। यह वास्तव में  मुश्किल है और पढ़ते समय यदि आप चाहें तो इनको छोड़ भी सकते है।

गर्डल ने एक बार कहा

'We live in the World in which ninety-nine per cent of all beautiful things are destroyed in the bud.'
हम ऐसे संसार में रहते हैं जहां ९९ प्रतिश्त सुन्दर वस्तुएं शुरुवात में ही समाप्त हो जाती हैं।
मालुम नहीं क्यों मुझे लगता है कि यह हिन्दी चिट्टाजगत पर सही बैठता है। हम अच्छे लेख लिखने के बजाय, व्यर्थ की बात पर विवाद करते रहते हैं। 
गर्डल के अपूर्णनता सिद्धान्त के बारे में कुछ अन्य पुस्तकों की चर्चा - इस श्रंखला की अगली कड़ी में।
तू डाल डाल, मैं पात पात
भूमिका।। नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है।। नाई, महिला है।। मिस्टर व्हाई - यह कौन हैं।। गणित, चित्रकारी, संगीत - क्या कोई संबन्ध है।।


About this post in Hindi-Roman and Englishyeh chitthi cyber apradh ki shrakhlaa kee kari hai. is chitthi mein Gödel  kee jeevani aut us per do pustkon kee charcha hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.
This post is part of series on Cyber crimes. It talks about Gödel life and two books on him. It talks about whether Epimenides' or liar's paradox was sorted out in Pricipia Mathematica or not. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.
सांकेतिक शब्द
। Kurt Gödel, Incompleteness theorems, Artificial intelligence,

 
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क्या काली मां की कृपा से यह चमत्कार हो गया

इस चिट्ठी में प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी रमेश कृष्णन से मुलाकात की चर्चा है।

मुझे सारे रैकेट के खेल पसन्द हैं। टेनिस सबसे पहले खेलना शुरू किया। शायद ४थी-५वीं कक्षा से। मैंने इसकी कोचिंग भी ली है। बचपन में दुनिया के बेहतरीन टेनिस खिलाड़ियों को भी देखने का मौका भी मिला - रॉय एमरसन, फ्रेड स्टोले, मार्टिन मुलिगन, बॉब हेटिट, आयन टिरियाक, नास्तासे, रामानथन और रमेश कृष्णन, जयदीप मुकर्जी, प्रेमजीत लाल, अमृतराज बन्धु, निरुपमा वसंत, किरण बेदी आदि। 



मुझे आज भी, १९६६ में, कलकत्ता के साउथ कल्ब में भारत बनाम ब्राज़ील के डेविस कप इंटर ज़ोन फाईनल मैच  की याद है। उस समय, मैं स्कूल का विद्यार्थी था। मेरे कान में आज भी, रेडियो में आ रही कमेन्टरी की आवाज गूंजती है।

उस समय जयदीप मुकर्जी, प्रेमजीत लाल के साथ के साथ डबलस् खेलते थे। जयदीप उस बार कृष्णन के साथ खेले और डबलस् का मुकाबला जीत लिया। कृष्णन ने अपना एकल मुकाबला जीत लिया था लेकिन भारत अपने दोनो अन्य एकल मुकाबले हार चुका था। मैच स्कोर दो बराबर। पांचवां मैच रामानाथन कृष्णन बनाम थॉमस कॉख। कृष्णन १-२ सेट, चौथे सेट में २-५ गेम, और आठवें गेम में १५-३० से पीछे।

ब्राज़ील से मैच जीतने के बाद,  ऑस्ट्रेलिया के टोनी रॉश् और जॉन न्यूकॉम्ब विरुद्ध जयदीप मुकर्जी और रामानाथन कृष्णन डबल्स् का मैच खेलते हुऐ। यह मैच भारत ने जीता पर मुकाबला १-४ से हार गया। चित्र हिन्दू अखबार के सौजन्य से।  

आप उस समय के तनाव को तब तक नहीं समझ सकते जब तक आपने स्वयं वह आखों देखा हाल न सुना हो या आपने वह मैच न देखा हो। वहां से लगातार कृष्णन ने लगातार ९ गेम जीत लिऐ और मैच भी। भारत को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चैलेंज राउंड में खेलने का मौका मिला। क्या काली मां की कृपा थी कि यह चमत्कार हो गया। कृष्णन तो यही कहते हैं। वे मैच के तुरन्त बाद काली मां के मन्दिर गये। 



कुछ इसी तरह का कारनामा रमेश कृष्णन ने १९९३ में फ्रांस के विरुद्ध कर दिखाया था।


कुछ समय पहले, मुझे रमेश से एक कल्ब में मिलने का मौका मिला और यह मौका में नहीं छोड़ना चाहता था। हमने साथ साथ डबलस् का एक सेट भी खेला। वे मेरे साथी थे। बीच, बीच में, वे मेरी गलतियों को सुधारते जाते थे। इस उम्र में, अब क्या मैं टेनिस सीखू पांऊगा पर उनके प्यार से समझाने में मजा ही कुछ और था। वे कहने लगे चाहे दूसरी तरफ गेंद कोर्ट के बाहर चली जाय पर नेट नहीं अटकनी चाहिये। एक बार जब वे स्वयं यह गलती कर गये तो अपने आप से कहा। दूसरों को सलाह दे रहा हूं पर इसे तो मुझ भी मानना चाहिये।


खेलने के बाद, हमने कुछ समय साथ बिताया। मेरे पास उनकी वा उनके पिता की निर्मल शेकर के साथ लिखी पुस्तक 'अ टच ऑफ टेनिस - द स्टोरी ऑफ टेनिस फैमिली' थी। इस पर मैंने उनसे हस्ताक्षर लिये। पूछने लगे, 
'मैं अपने पिता के भी दस्खत कर सकता हूं। क्या उनके लिये भी कर दूं।'
मैंने कहा नहीं मैं अगली बार चेन्नेई आउंगा तब खुद मिल कर करवाऊंगा।

सरल हृदय के व्यक्ति, उम्र में मुझसे बहुत छोटे, पर कद में कहीं ऊंचे। मैंने विश्वविद्यालय स्तर तक का टेनिस खेला है। आजकल कभी, कभी कल्ब में ही खेलता हूं। लेकिन उनके मुकाबले नगण्य। उन्हें मेरे साथ, मेरे पार्टनर बन कर खेलने में कोई हिचक नहीं थी। बात करने में कोई घमन्ड नहीं। यह उनका बड़प्पन था। रमेश ने कुछ अपने बारे में भी बताया।

रॉय एमरसन टेनिस के बेहतरीन खिलाड़ी रहें हैं। वे ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी थे पर अब कैलीफोर्निया में बस गये हैं। वे हर साल दो महीने के लिये स्विटज़रलैण्ड में टेनिस का कैम्प करते हैं। रमेश गर्मियों में वही उस कैंप में रहते हैं।  


रमेश को दो बेटियां हैं। उनके बारे में भी बात की। वे  अमेरिका में पढ़ रही हैं। प्रतियोगिता स्तर का टेनिस तो नहीं, पर अपने विश्वविद्यालय स्तर का खेल खेलती हैं। वे अपने पिता रामानाथन कृष्णन के साथ चेन्नई टेनिस ऐकादमी तो नहीं पर टेनिस कल्ब चला रहें हैं।

उनके साथ समय बिताना सुखद अनुभव रहा। अगली बार चेन्नई में मिलने का वायदा कर, मैंने उनसे विदा ली। देखिये कब चेन्नई में उनके पिता रामानाथन कृष्णन से मिल पाता हूं। 

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This post is about my meeting with Ramesh Krishnan and is about autobiography  'A Touch of Tennis - A Story of Tennis Family'.  It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द

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'बुलबुल मारने पर दोष लगता है' श्रृंखला के नाम का चयन कैसे हुआ

'बुलबुल मारने पर दोष लगता है' श्रृंखला, 'To Kill A Mockingbird' उपन्यास के बारे में थी। इस श्रृंखला में चर्चा थी कि यह उपन्यास क्यों लिखा गया , इसकी क्या कहानी थी, इसकी क्या शिक्षा है। इस चिट्ठी में चर्चा है कि इसका श्रृंखला के नाम का चयन कैसे हुआ।

इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
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देखें।

मेरी बिमारी के समय मेरे बेटे और बिटिया रानी ने कुछ पुस्तकें पढ़ने के लिये भिजवायीं थीं। इनमें से एक पुस्तक  'हू द हेल इज़ ओ ॑-हारा'  (Who the Hell is O'Hara) है। इस पुस्तक में, दुनिया के ५० बेहतरीन लिखे उपन्यासों के बारे में लिखा है कि वे किस प्रकार से लिखे गये हैं। यह पुस्तक पढ़ने योग्य है।

इस पुस्तक में एक लेख 'टू किल अ मॉकिंगबर्ड' उपन्यास के बारे में था। इस उपन्यास को मैंने अपने बचपन में पढ़ा था तभी इस पर बनी फिल्म भी देखी थी। इसी को पढ़ते समय मुझे इस श्रृंखला को लिखने का विचार आया और इसकी रूप रेख बनायी। फिर सवाल उठा कि इस श्रृंखला का क्या नाम रखा जाय।

इस उपन्यास में एक वाक्य है।
'It is sin to kill a mockingbird'
मुझे लगा कि इस श्रृंखला का यही नाम होना चाहिये। अब सवाल उठा कि इसका उचित हिन्दी अनुवाद क्या होगा।

मॉकिंगबर्ड एक छोटी सी चिड़िया होती है। यह मुधर आवाज़ के लिये जानी जाती है। यह केवल अमेरिका में पायी जाती है। इसलिये इसका हिन्दीं में कोई नाम नहीं है। शास्त्री जी ने अनुवाद नहीं सुझाया पर कहा,
'Mockingbird is a harmless bird, but since it tends to sing after midnight, many are irritated and kill it. I have not seen a Hindi equivalent. Any saying that says we should not kill the innocent due to our personal annoyance will do. I have not come across any Hindi saying for that.'
मॉकिंगबर्ड निर्दोष चिड़िया होती है। यह आधी रात के बाद गाती है इसलिये लोग खिजाते हैं और मारते हैं। मुझे इसके बारे में हिन्दी में कहावत नजर नहीं आयी। लेकिन कोई भी कहावत जो यह कहती हो कि निर्दोष को मारना गलत है ठीक होगी।

अरविन्द जी ने सुझाया,
'सोन  चिरैया को मारने पर दोष लगता है।'
सोन चिरैया - चित्र विकिपीडीया से
सोन चिरैया या Indian bustard एक बड़ी चिड़िया है और अपनी सुंदरता के लिये जानी जाती है अपनी मधुर आवाज़ या गाने के लिये नहीं। यह लुप्त हो रही है यदि हमने इसे रोका नहीं तो यह हमेशा के लिये गायब हो जायगी। 

मुझे सुनने में यह शीर्षक अच्छा लगा। लेकिन इस उपन्यास में मॉकिंगबर्ड  गाने वाली छोटी चिड़िया है और निर्दोषता का प्रतीक है। मैं  किसी छोटी गाने वाली चिड़िया का ही नाम रखना चाहता था। मेरे परिवार वालों ने कोयल, मैना, शमा नाम सुझाया पर मुझे में बुलबुल नाम ठीक लगा। 

बुलबुल एक छोटी गाने वाली चिड़िया है जो निर्दोष है और अपने देश में जानी जाती है। इसकी प्यारी आवाज यहां सुन सकते हैं। यह मेरे घर में बहुत आती है। अब सवाल उठा कि शीर्षक क्या होना चाहिये। 

मेरी पत्नी शुभा ने कुछ अन्य शीर्षक सुझाये,

बुलबुल हत्या, पाप है।
बुलबुल हत्यारा दोषी है।
बुलबुल मारना, पाप है
बुलबुल को मारना पाप है

अन्त में मुझे अरविन्द जी का शीर्षक ही पसन्द आया। बस सोन चिरैया की जगह बुलबुल कर दिया और 'को' शब्द गायब कर दिया - मिल गया इस श्रंखला का शीर्षक, 'बुलबुल मारने पर दोष लगता है'।  

अभी कुछ कम समझ में आ रहा है और समय की भी कमी लगती है। देखिये कब कोई नयी श्रृंखला शुरू कर पाता हूं।

इस श्रृंखला की पिछली कड़ियां नीचे चटका लगा कर पढ़ें। यदि उस कड़ी को सुनना चाहें तब उस कड़ी के आगे लगे ► चिन्ह पर चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, 'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने' देखें।

भूमिका: ।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी - कोर्टरूम: ।। सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं: ।। कैमल सिगरेट के पैकेट पर, आदमी कहां है: ।। अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है: ।। जुरी चिट्ठे में जालसाज़ी की गयी है: ।। क्या 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड'  हर्पर ली की जीवनी है: ।। बचपन के दिन भी क्या दिन थे: ।।
पुनः लेख - 'बुलबुल मारने पर दोष लगता है' श्रृंखला के नाम का चयन कैसे हुआ: ।।








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The series 'Bulbul maarne per dosh lataa hai' was about the novel ‘To Kill a Mockingbird’. This post explains why this series was so named. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


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