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क्या टैटूईन ग्रह की तरह हमारे भी दो सूरज होंगे

इस चिट्ठी में, स्टार वारस् फिल्म श्रृंखला,  औरायन तारा समूह के दूसरे सबसे चमकीले तारे बीटलजूस (या बॅटेलजऍस) के सूपरनोवा बनने की चर्चा है।
टैटूईन ग्रह में सर्यास्त का दृश्य
'उन्मुक्त जी, क्या टैटूईन नया ग्रह मिल गया है? क्या यह ज्योतिष को गलत सिद्ध कर देगा?'
नहीं भाई, नहीं बहना। मैं तो ज्योतिष के बारे में बात नहीं करना चाहता। मैं एक श्रृंखला लिख कर काफी परेशानी झेल चुका हूं। टैटूईन तो प्रसिद्ध विज्ञान कहानी फिल्म श्रंखला 'स्टार वॉरस्' का  काल्पनिक ग्रह है। इस फिल्म का हीरो ल्यूक स्काईवऑकर इस ग्रह के  शहर ट्यूनिसिआ में रहता है। यहां दो सूरज हैं।

इस फिल्म श्रृंखला में छः फिल्में हैं। सबसे पहली फिल्म 'स्टार वारस्' थी। इसका बाद में नाम 'द न्यू होप', रख दिया गया। यह इस फिल्म की चौथी कड़ी थी। उसके बाद इसकी दो उत्तर फिल्में 'द एम्पायर स्ट्राइक बैक' और 'रिटर्न ऑफ द ज़ेदाई' नाम से बनी। यह इस श्रृंखला की पांचवी और छटी कड़ी थीं।

इसके बाद इसकी तीन पूर्व कथायें 'द मैनस ऑफ फैंटम', 'अटैक ऑफ द क्लोंस्' और' 'रिवेंज ऑफ द सिथ' बनी। यह इस श्रृंखला की पहली, दूसरी, और तीसरी कड़ी थी।

'स्टार वारस्' फिल्म १९७७ में बनी थी। १९९७ में, इसकी बीसवीं वर्षगांठ पर, इसे स्पेशल एफेक्टस् के साथ पुनः जारी किया गया। ऊपर का दृश्य इस फिल्म से है।
'उन्मुक्त जी, हमारा दूसरा सूरज कहां से आयेगा?'
 आकाश में बहुता से तारा समूह हैं। शृंखला 'ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके' लिखते समय, मैंने इसकी कड़ी 'राशियां Signs of Zodiac' में तारा समूहों की चर्चा की थी। इसमें एक तारा समूह है मृगशीर्ष (हिरन- हिरनी) या Orion (ऑरायन) है।
यह चित्र हबल टेलेस्कोप की वेबसाइट से है।
इस तारा समूह को अपने यहां हिरण और ग्रीस में शिकारी के रूप में देखा गया है पर मुझे तो यह तितली सी लगती है। यह आजकल शाम से दिखाय़ी पड़ता है। इसे आप आसानी से पहचान सकते हैं।  

तारा समूह के चित्र में बांयी तरह के एक तारे पर पीले रंग का x बना है। यही तारा बीटलजूस (या बॅटेलजऍस) है। इस समय यह लाल दैत्याकार तारा है जिसका चित्र बायी तरफ दिखाया गया है।
'उन्मुक्त जी, यह बीटलजूस दूसरा सूरज कैसे बनेगा?'
'बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां' श्रृंखला की  कड़ी 'तारों का अन्त कैसे होता है' लिखते समय मैंने लाल दैत्याकार तारों और अधिनव तारा (Super nova) (सुपरनोवा), या नोवा (Nova), की चर्चा की थी। वहीं यह बात भी विस्तार से बतायी है।

बीटलजूस अपने सूरज से २० गुना ज्यादा भारी है। इसलिये यह तारा अधिनव तारा बन सकता है। यह शायद इस साल हो। इसलिये इसे दूसरा सूरज कहा जा रहा है।
'उन्मुक्त जी, तब क्या टैटूईन की तरह, हमारी पृथ्वी पर इसी तरह का दृश्य दिखायी देगा?'
इस समय रात के आकाश में, बीटलजूस, आकाश में आठवां और ऑरायन तारा समूह का दूसरा चमकीला तारा है। यदि यह सुपरनोवा बनता है तब यह रात के आकाश में सबसे चमकीला तारा हो जायगा लेकिन दूसरा सूरज नहीं बन पायेगा। शायद यह पूर्णमासी के चांद के बराबर हो पर दिन में न दिखायी पड़े। हांलाकि सबसे प्रसिद्घ सुपरनोवा, १०५४ ईसवी में देखा गया था। इसके बारे में चीन और अरब के खगोलशास्त्रियों ने लिखा है। यह दिन में भी, २३ दिन तक, और ६५५ रातों में यानि कि लगभग दो साल तक दिखायी पड़ा।
'क्या, जैसा मायन कैलेंडर कहता है, हमारी पृथ्वी में प्रलय आ जायेगी?'

बीटलजूस हमसे बहुत दूर है - लगभग ६०० प्रकाश वर्ष। इसलिये  इसलिये हो सकता है कि यह सुपरनोवा बन चुका हो। इसके बनने के ६०० साल बाद ही हमें उसका पता चलेगा। लेकिन खगोलशास्त्री कहते हैं कि इसकी जानकारी हमें इस साल के अन्त तक मिल सकती है।

 मायन कैलेंडर के मुताबिक तो २०१२ पृथ्वी का अन्तिम वर्ष है। यही कारण है कि आजकल तरह तरह की खबरें प्रकाशित हो रही हैं। किसी सुपरनोवा के द्वारा पृथ्वी पर तभी नुकसान हो सकता है जब वह हमसे केवल २५ प्रकाश या इससे कम दूरी पर हो। आप निश्चिन्त रहें। इससे हमारी पृथ्वी को कोई मुश्किल नहीं है। हमारे अन्त का कारण हम ही होंगे न कि कोई खगोलीय घटना।

 यह घटना कयामत का अग्रदूत न हो कर खगोलशास्त्र के लिये सैकड़ो सालों में होनावाला सबसे बड़ा फायदा है। 

इसके बारे एक छोटा सा विडियो देखिये। इसे देख कर आप इसे आसानी से आकाश में पहचान पायेंगे।

मुन्ना हमारा बेटा कुछ दिनों पहले भारत आया था। हमें उसके साथ दिल्ली में समय बिताने का मौका मिला। हम लोग वहां नेहरू तारा घर भी गये। वहां आजकल 'चन्द्रशेखर तारों के सहयात्री' नामक प्रोग्राम चल रहा है। चन्द्रशेखर ने अपना महत्वपूर्ण काम ब्लैक होल्स् पर किया है। इस प्रोग्राम में ब्लैक होलस् और अधिनव तारों के बारे में अच्छी जानकारी है। आप भी अपने बेटे और बेटियों के साथ यह प्रोग्राम देखें। 

यदि आपने स्टार वॉर्स्  फिल्म श्रंखला नहीं देखी है तब अवश्य देखें पर अपने बच्चों के साथ। आपको पसन्द आयेगी। उनके साथ ज्यादा समझ में भी आयेगी।

रात में सोने से पहले ऑरायन और बीटलजूस को देखना भी न भूलियेगा। घर वालों और पड़ोस के लोगों को दिखाइयेगा और यह भी बताइयेगा कि कोई प्रलय नहीं आने वाली है।

अरविन्द जी ने भी यहां इसके बारे में लिखा है उसे भी देखिये। कृपया नीरज जी की नीचे टिप्पणी भी देखें। उसके बाद मैंने कुछ संशोधन भी किया है और यह आपको इसे ढूढने में मदद भी करेगी।  

हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi
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'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने
 


About this post in Hindi-Roman and English 
is chitthi mein prasiddh vigyaan film shrnkhla star wars aur orion tara smooh ka tare betelgeuse ke supernova bnne kee  charcha hai.  yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhe

This post is popular science fiction film series 'Star Wars', and  Orion's star Beetelgeues  becoming a supernova. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द

आज, मुझसे शादी करोगी

इस चिट्ठी में डगलस ऐडम्स् की पुस्तक 'द हिचहाइकरस् गाइड टू द गैलैक्सी' की चर्चा के साथ आज की तारीख का सम्बन्ध बताया गया है।
'उन्मुक्त जी, शादी की शुभकामनायें।'
अरे भाई, घर से निकलवाइयेगा क्या।  मैं थोड़ी शादी करने जा रहा हूं पर आज बहुत से लोग शादी कर रहे हैं।
'उन्मुक्त जी, ऐसा क्या खास है आज के दिन।' 
कुछ जगहों में, कुछ समुदायों में, इतवार के दिन ही शादी की जाती है। पिछले साल इतवार ११ अक्टूबर को था। इस साल यह आज दस तारीख को है। लेकिन इस साल इतवार में शादी करने वाले लोग लगभग तीन गुने हैं। इसमें बहुत से कंप्यूटर और विज्ञान से जुड़े लोग भी हैं। और आज का दिन उनके लिये खास है। 
'उन्मुक्त जी, होगा क्या। यह लोग अंक विद्या में विश्वास करते होंगे। उसके हिसाब से आज का दिन शुभ होगा बस। लेकिन आपने ४२ संख्या क्यों लिख रखी है?'
मेरे विचार से अंक विद्या में कोई तथ्य नहीं। यह केवल अन्धविश्वास है - टोने टुटके की तरह। कंप्युटर या विज्ञान से संबन्धित लोग इस पर विश्वास नहीं करते हैं। लेकिन इसका कारण कुछ और है जिसका संबन्ध ४२ से है। 
'अरे, तो फिर जल्दी बताईये वह क्या है?'
सब्र कीजिये। इस संख्या का महत्व तो  आपको इस चिट्ठी के अन्त में पता चलेगा। पहले कुछ बाते अंक विद्या के बारे में। 

मैंने अपनी श्रृंखला 'ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके' लिखते समय, दो चिट्ठियां  अंक विद्या, डैमियन - शैतान का बच्चा लिख कर उस फिल्म-श्रृंखला की चर्चा की थी जिसमें इस अंक विद्या को महत्व दिया गया था। इसके बाद इसकी कड़ी अंक लिखने का इतिहास में, इसके गलत तरीके से विकास और लोकप्रिय होने का कारण बताया था। यदि आप इसे पढ़ेंगे तो पायेंगे कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है।

इस श्रृंखला को मैंने एक जगह सम्पादित कर लेख चिट्ठे ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके नाम की चिट्ठी पर रखा है। इस पर मुझे अक्सर सीमा के बाहर टिप्पणियां भी झेलनी पड़ती हैं। अंततः मैंने दो अन्य चिट्ठियां, ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके, श्रृंखला किसी को दुख देने के लिये नहीं लिखी तथा ज्योतिष, और अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ श्रृंखला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिये लिखी, लिख कर बताया कि मैंने यह श्रृंखला क्यों लिखीं थी लेकिन मेरे लेख चिट्ठे पर अभद्र टिप्पणियों का आना बन्द नहीं हुआ।

यह  चिट्ठी भी, मैंने किसी को दुख देने के लिये नहीं, लेकिन एक प्रसिद्ध विज्ञान कहानी संग्रह और उसका आज की तारीख से संबन्ध बताने के लिये लिखी है।

आज तारीख है १०.१०.१० - यह कुछ असमान्य सी तारीख है। जैसे २००९ की ९ सितंबर (०९०९०९) या २००८ की ८ अगस्त (०८०८०८)। बस इसलिये यह कुछ अजीबो-गरीब है।
'उन्मुक्त जी, क्या बस इसीलिये कंप्यूटर और विज्ञान वाले इस दिन शादी कर रहे हैं।'
नहीं, इसका कारण कुछ और ही है।

मैंने कुछ समय पहले 'नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू’ नामक श्रृंखला कई कड़ियों में प्रकाशित की। इसके बाद इसे सम्पादित कर २ की पॉवर के अंक, पहेलियां, और कमप्यूटर विज्ञान नाम से लेख चिट्ठे पर रखा। इसकी भूमिका और २ की पावर और कंप्यूटर विज्ञान और श्रृंखला का निष्कर्ष में बाईनरी सिस्टम की चर्चा की है। 

कंप्यूटर बाईनरी सिस्टम ही समझते हैं। यदि आज की तारीख १०१०१० को हम बाईनरी सिस्टम में लिखा माने और उसे डेसीमल सिस्टम, जिसमें हम काम करते हैं, में बदलें, तो यह २^५+०+२^३+०+२^१+० यानि कि ४२ के बराबर होगा। यहां ^ का अर्थ है पॉवर। २^५ का मतलब हुआ २ की पॉवर ५ यानी २x२x२x२x२ या ३२
'उन्मुक्त जी, आपको कुछ नहीं मालुम। अंक विद्या के अनुसार ४२ संख्या तो ६ के बराबर है। यह अंक महत्वपूर्ण है। इसी लिये यह लोग आज शादी कर रहें हैं, ठीक है न।'
डगलस ऐडम्स्
यह सच नहीं है। यह संख्या (४२) विज्ञान कहानी प्रेमियों के लिये महत्वपूर्ण है। उनके लिये यह खास नम्बर है।

डगलस ऐडम्स् एक अंग्रेजी लेखक हैं। १९७८ में उन्होंने बीबीसी की चैनल-४ में रेडियो प्रोग्राम की श्रृंखला की थी। बाद में वह पुस्तकों के रूप में लिखी गयीं। उन्होंने ५ पुस्तकें लिखीं थीं। छटवीं लिखने के पहले उनकी मृत्यु हो गयी। बाद में छटी पुस्तक ओवेन कोल्फर ने लिखी। 

पहले प्रकाशन पर पुस्तक का कवर
विज्ञान कहानियों की यह श्रृंखला, 'द हिचहाइकरस् गाइड टू द गैलैक्सी' के नाम से जानी जाती है। यह बाद में एच२जी२ (H2g2) के नाम से भी प्रसिद्ध है। १९८१ में इस पर टीवी श्रृंखला और डीसी कॉमिक्स ने पहली तीन उपन्यास में कॉमिक्स भी निकाली।

क्या आप जानते हैं कि इसकी सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति  क्या है। नहीं मालुम न, चलिये मैं बताता हूं। 
 
इसके प्रथम उपन्यास में, ब्रह्माण्ड के अत्यंत बुद्धिमान प्राणीगण जीवन का क्या मतलब है जानने के लिये अपने दो सबसे प्रबुद्ध प्राणियों को सुपर कंप्यूटर से अंतिम सवाल का, आखरी जवाब जानना के लिये नियुक्त करते हैं। कंप्यूटर उन्हें, ७५ लाख साल के बाद आने को कहता है। उस समय उसका जवाब होता है - ४२।  
'उन्मुक्त जी, समझ में नहीं आया। वह आखरी सवाल क्या था। जिसका जवाब ४२ था।'
वह सवाल क्या था यह किसी को नहीं मालुम, बस जवाब ही मालुम है :-) 
पहली कॉमिक का कवर

जब सुपर कंप्यूटर से पूछा जाता है कि आखरी सवाल क्या था, तब वह बताता है कि उसे उसका सवाल नहीं मालुम। लेकिन वह उससे भी अधिक शक्तिशाली कंप्यूटर (पृथ्वी) को बना सकता है। जिसके पास इसका जवाब हो। उसमें उन सब को, आदि-प्राणी की तरह जाना होगा। एक करोड़ साल बाद उसका जवाब मिल सकेगा। लेकिन जब उसका जवाब मिलने की बात होती है तब उसके ठीक ५ मिनट पहले पृथ्वी नष्ट हो जाती है।

वास्तव में, यह संख्या ४२ मज़ाक ही है। लेकिन इसे इस तरह देखें कि जिस दिन हमें आखरी सवाल और उसका जवाब मालुम चल जायगा। उस दिन हम इस ब्रह्माणड को जान लेंगे। फिर जीने का उद्देश्य ही समाप्त हो जायगा। वह जीवन का अन्त होगा।
'उन्मुक्त जी, कहानी तो कुछ रोचक लग रही है। क्या कुछ और प्रकाश डालेंगें।' 
आपको ही नहीं, यह बहुतों को रोचक लगती है। यही कारण है कि यह बीसवीं शताब्दी के अन्तिम चतुर्थांश की सबसे प्रसिद्ध विज्ञान कहानियों में से है। इसी लिये ४२ संख्या बहुत से विज्ञान कहानी प्रेमियों को भाती है। यही कारण है कि वे लोग इस दिन शादी कर रहे हैं। जहां तक इसकी कहानी की बात है वह तो अरविन्द मिश्रा जी से ही पूछिये। याहू पर साइंस फिक्शन ग्रुप वह चलातें हैं कि मैं :-)  

न तो मैं आज शादी कर रहा हूं न ही मेरी शादी आज हुई थी। मेरी शादी को तो जमाना गुजर गया। आज मेरी एक प्रिय भान्जी का जन्मदिन है। मैंने उसी के लिये यह चिट्ठी लिखी है।

इस पर फिल्म भी बनी यदि आप इसका वह भाग देखना चाहते हों, जहां पर कंप्यूटर सवाल का जवाब दे रहा है
तब नीचे देखें।
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'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने'

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is chitthi mein Douglas Adams kee likhi pustak  'The Hitchhiker's Guide to the Galaxy' kee charchaa ke saath aaj ke tareekh ke smbandh ke sameeksha hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post is book review of 'The Hitchhiker's Guide to the Galaxy' by Douglas Adams talks about its connection with today's date. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. 

सांकेतिक शब्द
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भाषायें लुप्त हो जाती हैं - गणित के सिद्घान्त नहीं

इस चिट्ठी में, एयोस्टोलोस डॉक्सिएडिस द्वारा लिखित उपन्यास, 'अंकल पेट्रोस एण्ड गोल्डबाकस् कंजेक्चर' की चर्चा है।
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, 'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने' देखें।


गोल्डबाक  १८वीं शताब्दी के गणितज्ञ थे। ७ जून १७४२ को उन्होंने जर्मन गणितज्ञ ल्योन्हार्ड ऑयला को पत्र लिखा कि उन्होंने यह पाया है कि दो से बड़ी, दो से विभाज्य होने वाली संख्या (even number), हमेशा दो अभाज्य संख्या (Prime) का जोड़ है। अब इसे उन्हीं के नाम पर, गोल्डबाक  अनुमान के नाम से जाना जाता है। यह नम्बर थ्योरी की सबसे पुराने अनुत्तरित प्रश्नों में से है। यह न तो अभी तक सही और न ही गलत सिद्घ हो पाया है।


उपन्यास 'अंकल पेट्रोस एण्ड गोल्डबाकस् कंजेक्च' की कहानी, गोल्डबाक अनुमान और कोर्ट गर्डल के अपूर्णनता सिद्घान्त के इर्द गिर्द घूमती है। यह मूलत: १९९२ में ग्रीक भाषा में लिखा उपन्यास है। वर्ष २००० में, इसे  फेबर एण्ड फेबर द्वारा अंग्रेजी में प्रकाशित किया गया। इसके प्रकाशकों ने इसकी बिक्री बढाने के लिये १० लाख डालर का पुरस्कार देने कि घोषणा की जो  इस पुस्तक के प्रकाशित होने के दो साल के अन्दर गोल्डबाक अनुमान को सही या गलत सिद्घ करे दे। यह बताने के जरूरत नहीं है कि कोई भी इस पुरस्कार को नहीं जीत सका।

यह कहानी है एक चाचा और भतीजे की। चाचा को उसके परिवार के लोग नाकामयाब व्यक्ति मानते हैं। चाचा अकेले रहना पसन्द करते हैं, किसी से मिलते नहीं हैं। भतीजे ने गणित में शिक्षा ली है और उसे पता चलता है कि उसके चाचा विलक्षण प्रतिभा के युवक थे। बाद में वे विश्वविद्यालय में सबसे कम उम्र में गणित के प्रोफेसर बने और लोग उनको इज्जत और सम्मान से देखते हैं। फिर ऎसा क्या हो गया कि उसके परिवार वाले उन्हें नाकामयाब मानते हैं।
चाचा, गोल्डबाक अनुमान को सिद्ध करना चाहते हैं और इसी में जीवन लगा देते हैं। लेकिन यह तो अनुत्तरित प्रश्न ही रहा। यही इसकी कहानी है जो कि गणित की लघुकथायें, किस्से, और घटनायें पर बुनी हैं। यह कहानी तो काल्पनिक है पर उसमें लिखी लघुकथायें, किस्से, और घटनायें सच हैं। यह बेहद रोचक पुस्तक है और गणित जैसे नीरस विषय पर रोमांच पैदा करती है। यह पुस्तक जी. एच. हार्डी की उत्कृष्ट रचना 'ए मैथमैटीशियनस् अपॉलोजी' के इस उद्घारण से शुरू होती है।
'Archimedes will be remembered when Aeschylus is forgotten because languages die and Mathematical ideas do not. Immortality may be a silly word but properly a mathematician  has the best chance of whatever it may mean'
लोग एस्काइलस् (ग्रीक नाटककार) को भूल जायेंगे पर आर्कमडीज़ को हमेशा याद रखेंगे।  क्योंकि, भाषायें लुप्त हो जाती हैं लेकिन गणित के सिद्घान्त समाप्त नहीं होते हैं। शायद अमरत्व बेवकूफी है। लेकिन यह जो कुछ भी है उसे पाने के लिये गणितज्ञ की ही संभावना सबसे अधिक है।
नम्बरों की बात हो और रामानुजम की बात न हो—यह तो हो नहीं सकता। इस पुस्तक में रामानुजम की भी चर्चा है और हार्डी-रामनुजम के टैक्सी नम्बर किस्से की भी।
इस पुस्तक में गर्डल के अपूर्णनता का सिद्घान्त का भी प्रयोग है लेकिन यह कैसे है और इस कहानी का क्या अंत है यह तो मैं आपको बताने से रहा। आपका इस पुस्तक को पढ़ने का रोमांच समाप्त कर,  मैं आपका मजा थोड़े ही किरकिरा करना चाहता हूं। आप इस पुस्तक को पढ़ें और आनन्द लें। यह आपको आसानी से समझ में आयेगी। अपने बेटे और बेटियों को अवश्य पढ़ने के लिये दें।

मैंने इस श्रंखला की भूमिका में, इंडिपैंडेंटस डे (Independence day) फिल्म का चित्र प्रयोग किया था। उसका साईबर अपराध से कैसे संबन्ध है यह अगली बार।

जी. एच. हार्डी (GH Hardy) की पुस्तक 'ए मैथमैटीशियनस् अपॉलोजी'  (A Mathematician's Apology) उत्कृष्ट रचना मानी जाती है। यदि आपने इसे नहीं पढ़ा है तो अवश्य पढ़ें। यह अन्तरजाल पर यहां पर उपलब्ध है। 
 
तू डाल डाल, मैं पात पात
 

About this post in Hindi-Roman and English  is chitthi mein Apostolos Doxiadis kee likhi pustak  'Uncle Petros and  Goldbach's Conjecture,' kee sameeksha hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.
This post is book review of 'Uncle Petros and  Goldbach's Conjecture,' by Apostolos Doxiadis. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. 

सांकेतिक शब्द
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क्या कंप्यूटर व्यक्तियों की जगह ले सकते हैं

इस चिट्ठी में, रॉजर पेनरोज़ के द्वारा लिखी 'द एमपररस् न्यू माइण्ड: कंसर्निग कंप्यूटरस्‌, माइण्डस् एण्ड द लॉज़ ऑफ फिज़िक्स' पुस्तक की समीक्षा है। 
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, 'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने' देखें।
रॉजर पेनरोज़ अंग्रेज गणित-भौतिक शास्त्री हैं। आपने 'द एमपररस् न्यू माइण्ड: कंसर्निग कंप्यूटरस्‌, माइण्डस् एण्ड द लॉज़ ऑफ फिज़िक्स' नामक बेहतरीन पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक में मुख्य तौर पर यह बताने की कोशिश की गयी है कि कंप्यूटर कभी भी व्यक्तियों की जगह नहीं ले सकता हैं।

गणीतीय तर्क शास्त्र अलगोरिथम  पर आधारित है। यह गर्डल के अपूर्णनता सिद्धान्त से बंधा है। पेनरोज़ का मानना है कि मानव चेतना  ग़ैर-अलगोरिथमी (non-algorithmic) है।  यही कारण है कि इसे कभी भी गणीतीय तर्क शास्त्र पर आधारित डिज़िटल कंप्यूटर से नहीं बदला जा सकता है।

पेनरोज़, इस पुस्तक में पुस्तक में, न्यूटन के भौतिक शास्त्र, आइंस्टाइन के सापेक्षता सिद्धान्त  (special and general relativity), क्वांटम भौतिक शास्त्र (quantum physics), ब्रह्माण्ड विज्ञान (cosmology), समय की प्रकृति (nature of time) और गणित का दर्शन एवं उसकी सीमा (the philosophy and limitations of mathematics), की चर्चा करते हुऐ अपनी बात रखते हैं।

यह पुस्तक भौतक शास्त्र का एक विहंगम दृश्य (bird's eye view) दिखाता है और इस विषय के बारे में रोचक तरीके से सूचना देता है।

यह  बेहतरीन पुस्तक है और उत्कृष्ट पुस्तकों में से एक हैं।   इस पुस्तकों को समझने के लिए कम से कम  इण्टरमीडिएट या स्नातक स्तर के भौतिक शास्त्र का ज्ञान जरूरी  है और तभी यह पढ़ने पर अच्छी तरह से समझ में आ सकेगी।  यदि आप विज्ञान के छात्र है या विज्ञान में आगे कुछ कार्य करना चाहते है। या आपके बेटे, बेटियां इन क्षेत्रों में काम करना चाहती है तब उन्हें यह पुस्तक पढ़ने के लिए अवश्य दें।

ऐलेन मैथिसॉन ट्यूरिंग (२३.६.१९१२ से ७.६.१९५४) अंग्रेज गणितज्ञ, तर्क शास्त्री, गूढ़लेखिकी विशेषज्ञ (cryptanalyst) एवं कंप्यूटर विज्ञानिक थे। कंप्युटर विज्ञान  और अलगोरिथम (algorithm) को रूप देने और आधुनिक कंप्यूटर के निर्माण में अग्रणी थे।
बीबीसी की डेंजरस् नॉलेज (Dangerous Knowledge) श्रृंखला का जिक्र मैंने अपनी चिट्ठी 'नाई महिला है' में किया था। यह श्रृंखला चार विलक्षण प्रतिभा के व्यक्ति, जिसमें तीन गणितज्ञ- जॉर्ज कैंटर, कोर्ट गर्डल, और ऐलन ट्यूरिंग  - और एक भौतिक शास्त्री लुडविंग बॉल्टज़मैन पर थी। उस चिट्ठी में, श्रृंखला का वह भाग भी दिखाया था जिसमें गर्डल के शुरू के जीवन के बारे में है। उसके बाद एवं ट्यूरिंग के जीवन के बारे में यहां देखिये। इसमें ट्यूरिंग गर्डल के अपूर्णता सिद्धान्त को कंप्यूटर के क्षेत्र में लागू करते समय भी यह कहते हैं कि कुछ सवाल ऐसे भी हैं जिन्हें कंप्यूटर के द्वारा हल नहीं निकाला जा सकता है।

'उन्मुक्त जी, हमें तो घबराहट हो रही है। लगता है कि जिन पुस्तकों की आपने चर्चा की है वे सारी कठिन हैं। क्या गणित और अपूर्णता के सिद्धान्त के बारे में कोई आसान पुस्तक है?'
है तो।

इन्दू जी गणित की अध्यापिका हैं। उनके चिट्ठे का नाम उनकी पुत्री के नाम 'पार्थवी' पर है। उस चिट्ठे पर वे गणित और उसकी पहेलियां पर चर्चा करती हैंमुझे आपका चिट्ठा अच्छा लगता है। 

कुछ समय पहले उन्होंने 'गणित की वो समस्याये : जिन्हें कोई हल ना कर सका --१' लिखते समय गोल्डबाख अनुमान की चर्चा की थी। उस समय मुझसे इसके बारे में लिखने के लिये कहा था। ऊपर जिस आसान पुस्तक का मैंने जिक्र किया है वह गोल्डबाख अनुमान और गर्डल के सिद्धान्त से सम्बंधित है। 

इन्दू जी की अनुरोध पर, उसकी चर्चा इस श्रंखला की अगली कड़ी में।
तू डाल डाल, मैं पात पात
भूमिका।। नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है।। नाई, महिला है।। मिस्टर व्हाई - यह कौन हैं।। गणित, चित्रकारी, संगीत - क्या कोई संबन्ध है।। क्या कंप्यूटर व्यक्तियों की जगह ले सकते हैं।।
 

About this post in Hindi-Roman and English  is chitthi mein roger penrose kee likhi pustak  'The Emperor's New Mind: Concerning Computers, Minds and The Laws of Physics' kee sameeksha hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.
This post is book review of The Emperor's New Mind: Concerning Computers, Minds and The Laws of Physics' by Roger Penrose. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. 
सांकेतिक शब्द
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तू डाल डाल, मैं पात पात

यह चिट्ठी, साइबर अपराधों पर नयी श्रृंखला की भूमिका है।
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने'
देखें।
फिल्म 'इंडिपेंडेन्स डे' से

क्या आपको मालुम है कि आज किसका जन्म दिन है? मेरा तो नहीं  है पर है किसी खास व्यक्ति का।
'उन्मुक्त जी, कौन है वह व्यक्ति? क्या चिट्ठकार है? ज्लदी बताइये, उसे बधाई तो दे दें।'
वह चिट्ठकार तो नहीं है, पर है एक महान व्यक्ति, एक महान तर्क शास्त्री है। मेरे विचार से आज तक हुऐ सारे तर्क शास्त्रियों में महानतम―नाम है उसका, कोर्ट गर्डल (Kurt Gödel)।
चित्र इंस्टिट्यूट ऑफ एडवान्सड स्टडीज़ की वेबसाइट से

कोर्ट गर्डल का जन्म २८ अप्रैल १९०६ में , बर्नो चेक रिपब्लिक (Czech Republic) में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ायी वियान ऑस्ट्रिया में पूरी की पर बाद में इंस्टिट्यूट ऑफ एडवान्सड स्टडीज़, प्रिंक्सटन  चले गये। वहीं उनकी मृत्यु  १४ जनवरी १९७८ में हो गयी।

'उन्मुक्त जी आपका शीर्षक तो है "तू डाल डाल, मैं पात पात” हम तो समझे कि यहां कुछ छकने, छकाने की बात होगी। लेकिन आप तो चालू हो गये तर्क शास्त्री कोर्ट गर्डल की बात करने। मालुम नहीं पहला चित्र क्या है, लगता है कि कहीं लड़ाई हो रही है।
हमें तो आप "द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर" फिल्म की याद दिला रहे हैं। आपको याद है वह फिल्म। आप शीर्षक कुछ देते हैं, लिखने कुछ और लग जाते हैं।'

मुझे  'द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर' फिल्म की बहुत अच्छी तरह से याद है। यह १९६१ में बनी वॉल्ट डिज़नी की लोकप्रिय फिल्मों में से एक है। इसे मैंने चौथी या पांचवी कक्षा में पढ़ते समय देखा था। 

कौन भूल सकता है उस प्रोफेसर को, जिसने  भूल से, उड़ते रबर (flying rubber) (flubber) (फ्लबर) का आविष्कार कर लिया था। इसी रोमांच में वह अपनी शादी की तारीख भूल गया। बस, गुस्से में, उसकी मंगेतर ने शादी तोड़ दी और वह किसी अन्य से दोस्ती का दिखावा करने लगी। फिल्म में, फल्बर के साथ प्रोफेसर के रोमांचकारी किस्से और  अपने प्यार को वापस पाने की कहानी है।  कितनी प्यारी फिल्म थी, आज भी  याद है।


यह फिल्म, सैमुएल टेलर की विज्ञान कहानी 'अ सिचुऐशन ऑफ ग्रैविटी'  (A Situation of Gravity by Samuel W Taylor) नामक कहानी के ऊपर बनी है। इसके बाद १९६३ में वॉल्ट डिज़नी ने इसकी ऊत्तर कथा फिल्म 'सन ऑफ फल्बर' (Son of Flubber) बनायी। यह  श्याम-श्वेत फिल्में थीं। कुछ साल पहले, 'ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर' को नये सिरे   से रंगीन फिल्म फल्बर नाम से बनाया गया। मुझे याद है यह सब।

मैं बहुत कुछ हूं, मेरे चिट्ठियां इसकी गवाह हैं पर मैं भुलक्कड़ नहीं हूं। यह शीर्षक है, मेरी नयी श्रंखला का जो मैं साइबर अपराधों और कंप्यूटर हैकर के बारे में लिख रहा हूं। मैंने जानबूझ कर यह शीर्षक दिया है और 'इंडिपेंडेन्स डे' फिल्म का चित्र लगाया है।
'उन्मुक्त जी, अब समझ में आया कि आपने इस श्रंखला का नाम "तू डाल डाल, मैं पात पात" क्यों रखा।  चोर-सिपाही के खेल में, अक्सर चोर सिपाही से एक कदम आगे रहते हैं। कंप्यूटर हैकर भी, कंप्यूटर विशेषज्ञयों से आगे रहते हैं। इसलिये आपने इस श्रंखला का यह नाम रखा है। है न सही?'
बिलकुल सही फरमाया आपने। 
'क्या खाक सही फरमाया उन्मुक्त जी―पैर कब्र में जा रहे हैं लेकिन मज़ाक करने की आदत नहीं गयी। कोर्ट गर्डल या इस इस चित्र का, इस विषय से क्या समबंध। हमें बेवकूफ न बनाइये।'
 मेरे भाई, मेरी बहना, इतनी जल्दी नहीं। न केवल कोर्ट गर्डल, पर फिल्म 'इंडिपेंडेन्स डे' (जिस फिल्म से ऊपर का चित्र चित्र लिया गया है) का सम्बन्ध, इस विषय है। यह कैसे है इसका पता तो आपको इस श्रृंखला के दौरान चलेगा। इंतजार कीजिये इस श्रंखला की अगली कड़ी का, लेकिन उसमें कुछ समय लगेगा। मैंने इस कड़ी को केवल इसलिये प्रकाशित कर दिया क्योंकि आज कोर्ट गर्डल का जन्मदिन था।

अगली बार हम बात करेंगे कि कोर्ट गर्डल क्यों प्रसिद्ध हैं, उनके बारे में कुछ चर्चा, और
मुझे यह श्रृंखला लिखने का विचार कैसे आया।

फिल्म 'द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर' में प्रोफेसर की, अपनी मगेंतर से पुनः मित्रता हो जाने के बाद के कुछ दृश्य


तू डाल डाल, मैं पात पात
भूमिका।।






About this post in Hindi-Roman and English yeh chitthi cyber apradhon per nayee shrankhla kee bhumika hai. yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post is introduction to my new series on cyber crimes. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
Hindi, पॉडकास्ट, podcast,

हम न मानेंगे, हमारे मूरिसान लंगूर थे

इस चिट्ठी में चर्चा है कि, हिन्दुओं में विकासवाद का क्यों नहीं विरोध हुआ, और क्या भगवान विष्णु का वामन अवतार होमो फ्लॉरेसिएन्सिस (जिसके अस्थि पंजर इंडोनीशिया में मिले हैं) से प्रेरित है।
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने'
देखें।


पाश्चात्य देशों में, डार्विन के विकासवाद का विरोध हुआ। अमेरिका में यह अब भी जारी है। हिन्दुओं में यह विरोध नहीं हुआ। ऐसा क्यों है? 

मुझे लगता है कि हिन्दूओं में सृष्टि रचना के बारे में कई विचारधारायें हैं। इनके बारे में, मैंने अपनी चिट्ठियों में लिखा है। इन कहानियों में, एक में तो सृजनवाद है पर किसी और में नहीं - शायद यही कारण हो कि हिन्दुओं में डार्विन के विकासवाद का विरोध नही हुआ। इस बारे में जब मैंने विस्तार से जानना चाहा तो कुछ यह पता चला।

पतञ्जलि योग पीठ में, ऋषि पतञ्जलि की प्रतिमा

मेरे पिता के अनुसार, पतञ्जलि का योग दर्शन कुछ और नहीं पर डार्विन का विकासवाद है। विकिपीडिया में कुछ भी कुछ इस तरह के भी विचार हैं कि स्वामी विवेकानन्द ने, पतञ्जलि  के योगसूत्र पर लिखते हुऐ कहा है कि अद्वैत वेदान्त का विकासवाद, डार्विन के विकासवाद के सिद्धान्त के अनुरूप है। भारतीय दर्शन या पतञ्जलि  का योग दर्शन मैंने नहीं पढ़ा है। इसे  पढ़ने का प्रयत्न किया। लेकिन मुझे यह मुश्किल लगा। मुझे अच्छा लगेगा यदि दीपक भारतीय जी, या कोई अन्य चिट्टाकार बन्धु इसकी आसान शब्दों में व्याख्या कर, लिखे।

एक अन्य विचारधारा के अनुसार, सृजनवाद पढ़ाना और डार्विन का विरोध - ईसायित से जुड़ गया है। इसका विरोध ईसायित का समर्थन समझा जाने लगा। इसलिये और धर्मों में, डार्विन के विकासवाद का विरोध नहीं के बराबर हुआ।

अरविन्द मिश्र जी ने मेरा ध्यान, जवाहर लाल नेहरू की पुस्तक 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' (The Discovery of India published by Oxford University Press) पर दिलाया। इसके पेज ११६ पर नेहरू जी लिखते हैं,
'Nevertheless the Old Indians, unlike the other ancient nations, had vast conceptions of time and space. They thought in a big way. Even their mythology deals with ages of hundreds of millions of years. To them the vast periods of modern geology or the astronomical distances of the stars would not have come as surprise. Because of this background, Darwin's and other similar theories could not create in India the turmoil and inner conflict which they produced in Europe. The popular mind in Europe was used to a time scale which did not go beyond a few thousand years.'
प्राचीन भारतीय, अन्य देशों की तरह से नहीं थे। उन्हें दूरी एवं यगान्तर का ज्ञान था। वे बड़ी तरह से सोचते थे। हमारे पुराण खरबों साल की बात करते हैं। हमें भूगर्भशास्त्र में लम्बे समय के कालचक्र या तारों की दूरी से, कोई आश्चर्य नहीं हुआ। यही कारण है कि डार्विन के या इस तरह के अन्य सिद्धान्त ने उस तरह की मुश्किल नहीं खड़ी की, जैसा युरोप में हुआ। युरोप के लोगों के दिमाग में,  इतने बड़े समय का विचार ही नहीं था। वे केवल कुछ हज़ार साल के बारे में सोचते थे।
इस श्रंखला की तीन चिट्ठियां हिन्दूओं में सृष्टि रचना के बारे में यहां, यहां, और यहां लिखी हैं। इन चिट्ठियों और इस चिट्ठी पर अशोक पाण्डेय जी, दीपक भारतीय जी, ने इस तरफ इशारा किया है।


कुछ समय पहले यात्रा करते समय एक ज्ञानी जन से मुलाकात हुई। उनसे इस विषय पर चर्चा होने लगी। उन्होंने बताया कि पुराणों में भगवान के २४ अवतारों का वर्णन है। इसमें भगवान विष्णु के १० अवतार मुख्य हैं यह दस कुछ इस तरह से हैं
  1. मत्स्य (मछली) पानी में रहने वाले जीव;
  2. कच्छप kchchhp  (कछुआ) उभयचर जन्तुओं की उत्पत्ति; 
  3. वाराह Varaah (सुअर) – जमीन के जानवरों की उत्पत्ति;
  4. नृसिंह Narasingh – आधे मानव;
  5. वामन – बौने मानव; 
  6. परशुराम – पूर्ण विकसित मानव;
  7. राम Rama – मानव, शस्त्रों के साथ;
  8. कृष्ण – मानव, संगीत के साथ;
  9. गौतम बुद्ध Budhha – शांति और करुणा का प्रतीक;
  10. कल्कि Kalki शायद यह ८४ हज़ार साल बाद आना है। इसी के साथ कलियुग की समाप्ति है और एक चक्र पूरा होगा।
यह वही क्रम है जो डार्विन के विकासवाद में, जीवों की उत्पत्ति का क्रम है। उन सज्जन के मुताबिक डार्विन के विकासवाद का विरोध इसी कारण नहीं हुआ क्योंकि इसे हमारे पुराणों में, इसे पहले से ही बताया गया है। 

इन दस अवतारों में तीसरे के बारे में कछ बहस है। कुछ का कहना है कि वाराह अवतार तीसरा न होकर पहला है। जो इसे पहला अवतार कहते हैं वे इसे पृथ्वी की रचना से जोड़ते हैं न कि जमीन के जानवरों की उत्पत्ति से।

कुछ दिन पहले, मैंने  साइंटिफिक अमेरिकन के नवंबर २००९ के अंक में 'Rethinking "Hobbits": What They Mean for Human Evolution' नामक एक लेख पढ़ा।

'उन्मुक्त जी, क्या इस लेख का संबन्ध, भगवान विष्णु के १० अवतारों से है?'
शायद, मेरे भाई, मेरी बहना इतनी जल्दी में क्यों रहते हैं। कुछ तो इंतज़ार करिये।

सन २००४ में, इंडोनीशिया के लॅसर सुन्दा द्वीप समूह के फलॉरस्  द्वीप की, लिएंग बुआ गुफा में  कुछ अस्थि पंजर मिले थे। साइंटिफिक अमेरिकन  का उक्त लेख, उन्हीं के बारे में था। इस अस्थिपंजर को, इस गुफा के नाम पर, एलबी१ (LB1) का नाम दिया गया। यह अस्थिपंजर, हजारों साल पहले के लुप्त मानव के हैं।  चूंकि यह फलॉरस् द्वीप पर मिलें हैं। इसलिये इनका वैज्ञानिक नाम होमो फ्लॉरेसिएन्सिस रखा गया। लेकिन इनका लोकप्रिय नाम, यह नहीं है। इन्हें जेआरआर टोकियन  के लोकप्रिय उपन्यासों के मानव,  हॉबिट के नाम से जाना जाता है। क्या आपको मालुम है कि ऐसा क्यों है? 

होमो फ्लॉरेसिएन्सिस एवं मानव कपाल - चित्र पीटर बॉउन/ न्यू इंगलैंड विश्विदयालय के सौजन्य से

टोकियन ने, हॉबिटों के बारे में चर्चा, सबसे पहले बच्चों के लिये लिखे उपन्यास 'द हॉबिट'  में की थी। इसके बाद इनकी चर्चा, लॉर्ड ऑफ रिंगस् की तीन पुस्तकों (Triolgy) में की। यह ऐसी सभ्यता है, जिसमें बौने (तीन से चार फीट के बीच) रहा करते हैं। इन बौनो को, उन्होंने  हॉबिट (Hobbit) कहा। इंडोनीशिया में मिले होमो फ्लॉरेसिएन्सिस  के अस्थिपंजर यह बताते हैं कि यह भी बौने थे और उनकी लम्बाई तीन से चार फीट के बीच थी। इसलिये इनका लोकप्रिय नाम हॉबिट है। क्या यह आपको किसी और की याद दिलाते हैं?

भगवान विष्णु, वामनअवतार में राजा बालि से तीन कदम जमीन मांगते हुऐ चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से

क्या आपको इनका संबन्ध हिन्दू धर्म से लगता है? क्या भगवान विष्णु का चौथा अवतार होमो फ्लॉरेसिएन्सिस से प्रेरित था? क्या भगवान के विष्णु के अवतार,  डार्विन के विकासवाद को नहीं बताते हैं? मैं कह नहीं सकता, कुछ उलझन में फंस गया हूं।

चलते चलते, एक दिन मित्र मंडली के साथ डार्विन पर चर्चा हो रही थी। मेरे शायर दोस्त ने, अकबर इलाहाबादी का यह शेर सुनाया,
हज़रते डार्विन, हकीकत से बहुत दूर थे।
हम न मानेंगे, हमारे मूरिसान [पूर्वज] लंगूर थे।
यह श्रंखला तो पहले समाप्त हो गयी थी यह तो केवल पुनः लेख था। कोशिश करता हूं कि किसी नयी श्रृंखला के साथ मुलाकात करूं। लेकिन समय आभाव के कारण कुछ मुश्किल लग रहा है।


क्या आपने कभी विकासवाद क्यों सही है और सृजनवाद गलत इस बात को रैप नृत्य के साथ देखा है। नहीं न तो यहां इसका मजा लें।


डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े 
भूमिका।। डार्विन की समुद्र यात्रा।। डार्विन का विश्वास, बाईबिल से, क्यों डगमगाया।। सेब, गेहूं खाने की सजा।। भगवान, हमारे सपने हैं।। ब्रह्मा के दो भाग: आधे से पुरूष और आधे से स्त्री।। सृष्टि के कर्ता-धर्ता को भी नहीं मालुम इसकी शुरुवात का रहस्य।। मुझे फिर कभी ग़ुलाम देश में न जाना पड़े।। ऐसे व्यक्ति की जगह, बन्दरों से रिश्ता बेहतर है।। विकासवाद उष्मागति के दूसरे नियम का उल्लंघन करता है।। समय की चाल - व्यवस्था से, अव्यवस्था की ओर।। मैंने उसे थूकते हुऐ देखा है।। यदि विकासवाद जीतता है तो इसाइयत बाहर हो जायगी।। विकासवाद पढ़ाना मना करना, मज़हबी निष्पक्षता का प्रतीक नहीं।। सृजनवाद धार्मिक मत है विज्ञान नहीं है।। 'इंटेलिजेन्ट डिज़ाईन' - सृजनवादियों का नया पैंतरा।। यू हैव किल्ड गॉड, सर।। हम न मानेंगे, हमारे मूरिसान लंगूर थे।।

इस चिट्ठी का पहला एवं आखरी चित्र - विकीपीडिया के सौजन्य से

About this post in Hindi-Roman and English
is chitthi mein charcha hai ki, hinduon mein vikasvaad ka kyon nahee virodh hua, aur kyaa bhagwan vishnu ka vaman avtar, homo floresiensis (jiske asthi panjar indonesia mein mile) se prerit hai. yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post talks about why there was no opposition of evolution among Hindus and was Vaman reincarnation of Vishu inspired by homo floresiensis, whose skeleton was found in Indonesia. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


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