इस चिट्ठी में, फिल्म इंडिपैंडेंटस डे (Independence day) और इसका साईबर अपराध से संबन्ध की चर्चा है। इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, 'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने' देखें।
इंडिपैंडेंटस डे एक विज्ञान कथा पर आधारित फिल्म है। इसकी कहानी कुछ इस प्रकार है।
दूसरे ग्रह से कुछ प्राणी आते हैं। पृथ्वीवासी उनका स्वागत करते हैं। लेकिन वे लोग पृथ्वी पर आकर, जन-जीवन को नष्ट करने लगते हैं। उनमें से एक प्राणी पकड़ा जाता है तब पता चलता है कि दूसरे ग्रह के निवासी नये, नये ग्रहों पर जाते और वहां के रहने वालें का जीवन समाप्त कर देते हैं। उसके बाद उनकी प्राकृतिक सम्पदा हर कर, दूसरे ग्रह पर चले जाते हैं। इस बात का पता चलते ही यह आवश्यक हो जाता है कि किसी तरह इनको समाप्त किया जाए।
जब दूसरे ग्रह से आयी उड़नतश्तरियों पर आक्रमण किया जाता है तब वह विफल हो जाता है। उनके चारो तरफ एक सुरक्षात्मक ढ़ाल थी जिसके अन्दर पृथ्वीवासियों के बम नहीं जा पा रहे थे।
इस ढ़ाल को भेदने के लिये, उनकी मुख्य उड़नतश्तरी के कंप्यूटर में एक वायरस भेजा जाता है। इसके कारण उनकी सुरक्षात्मक ढ़ाल में एक छेद हो जाता है। उस छेद से, एक हवाई जहाज, मुख्य उड़नतश्तरी के अंदर जाता है और उसमें एक परमाणु बम रख कर बाहर आ जाता है। परमाणु बम के फटने के बाद, न केवल मुख्य उड़नतश्तरी समाप्त हो जाता है पर बाकी उड़नतश्तरियों के चारो तरफ की सुरक्षात्मक ढ़ाल भी समाप्त हो जाती है। इसके बाद उन्हें समाप्त करने में कोई मुश्किल नहीं होती है। इस तरह से पृथ्वीवासियों की जीत होती है।
इस फिल्म में भी, कोर्ट गर्डल के अपूर्णता के सिद्वान्त का बाखूबी से प्रयोग किया गया है। दूसरे ग्रह के प्राणी पृथ्वीवासी से अधिक प्रगतिशील थे। उनके कंप्यूटर भी अच्छे थे। उसके बावजूद, वे उस पर वायरस जाने से नहीं रोक सके।
गर्डल के अपूर्णता सिद्वान्त का विस्तार व्यापक है। इसका एक अर्थ यह भी है कि दुनिया में कोई ऎसा किला नही है जो फतेह न किया जा सके और दुनिया में ऎसा कोई कंपूयटर नहीं है जिसमें अनाधिकृत प्रवेश (hack) न किया जा सके। इसी बात का प्रयोग इंडिपैंडेंटस डे फिल्म में किया गया है।
कहने का अर्थ यह है कि आप तकनीक की दृष्टि से अपने कंप्यूटर को जितना भी सुरक्षित कर लें, उसे हमेशा भेदा जा सकता है। कंप्यूटर में हैकिंग को केवल तकनीक के द्वारा नहीं रोका जा सकता है इसके लिए जरूरी है कि गलत काम को रोकने के लिए कानून बनाया जाए। इसलिए दुनिया में साइबर कानून है। इसके पहले साइबर अपराध पर नज़र डाले कुछ बातें साइबर कानून के बारे में।
इस चिट्ठी में डगलस ऐडम्स् की पुस्तक 'द हिचहाइकरस् गाइड टू द गैलैक्सी' की चर्चा के साथ आज की तारीख का सम्बन्ध बताया गया है।
'उन्मुक्त जी, शादी की शुभकामनायें।'
अरे भाई, घर से निकलवाइयेगा क्या। मैं थोड़ी शादी करने जा रहा हूं पर आज बहुत से लोग शादी कर रहे हैं।
'उन्मुक्त जी, ऐसा क्या खास है आज के दिन।'
कुछ जगहों में, कुछ समुदायों में, इतवार के दिन ही शादी की जाती है। पिछले साल इतवार ११ अक्टूबर को था। इस साल यह आज दस तारीख को है। लेकिन इस साल इतवार में शादी करने वाले लोग लगभग तीन गुने हैं। इसमें बहुत से कंप्यूटर और विज्ञान से जुड़े लोग भी हैं। और आज का दिन उनके लिये खास है।
'उन्मुक्त जी, होगा क्या। यह लोग अंक विद्या में विश्वास करते होंगे। उसके हिसाब से आज का दिन शुभ होगा बस। लेकिन आपने ४२ संख्या क्यों लिख रखी है?'
मेरे विचार से अंक विद्या में कोई तथ्य नहीं। यह केवल अन्धविश्वास है - टोने टुटके की तरह। कंप्युटर या विज्ञान से संबन्धित लोग इस पर विश्वास नहीं करते हैं। लेकिन इसका कारण कुछ और है जिसका संबन्ध ४२ से है।
'अरे, तो फिर जल्दी बताईये वह क्या है?'
सब्र कीजिये। इस संख्या का महत्व तो आपको इस चिट्ठी के अन्त में पता चलेगा। पहले कुछ बाते अंक विद्या के बारे में।
मैंने अपनी श्रृंखला 'ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके' लिखते समय, दो चिट्ठियां अंक विद्या, डैमियन - शैतान का बच्चा लिख कर उस फिल्म-श्रृंखला की चर्चा की थी जिसमें इस अंक विद्या को महत्व दिया गया था। इसके बाद इसकी कड़ी अंक लिखने का इतिहास में, इसके गलत तरीके से विकास और लोकप्रिय होने का कारण बताया था। यदि आप इसे पढ़ेंगे तो पायेंगे कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
कंप्यूटर बाईनरी सिस्टम ही समझते हैं। यदि आज की तारीख १०१०१० को हम बाईनरी सिस्टम में लिखा माने और उसे डेसीमल सिस्टम, जिसमें हम काम करते हैं, में बदलें, तो यह २^५+०+२^३+०+२^१+० यानि कि ४२ के बराबर होगा। यहां ^ का अर्थ है पॉवर। २^५ का मतलब हुआ २ की पॉवर ५ यानी २x२x२x२x२ या ३२
'उन्मुक्त जी, आपको कुछ नहीं मालुम। अंक विद्या के अनुसार ४२ संख्या तो ६ के बराबर है। यह अंक महत्वपूर्ण है। इसी लिये यह लोग आज शादी कर रहें हैं, ठीक है न।'
डगलस ऐडम्स्
यह सच नहीं है। यह संख्या (४२) विज्ञान कहानी प्रेमियों के लिये महत्वपूर्ण है। उनके लिये यह खास नम्बर है।
डगलस ऐडम्स् एक अंग्रेजी लेखक हैं। १९७८ में उन्होंने बीबीसी की चैनल-४ में रेडियो प्रोग्राम की श्रृंखला की थी। बाद में वह पुस्तकों के रूप में लिखी गयीं। उन्होंने ५ पुस्तकें लिखीं थीं। छटवीं लिखने के पहले उनकी मृत्यु हो गयी। बाद में छटी पुस्तक ओवेन कोल्फर ने लिखी।
पहले प्रकाशन पर पुस्तक का कवर
विज्ञान कहानियों की यह श्रृंखला, 'द हिचहाइकरस् गाइड टू द गैलैक्सी' के नाम से जानी जाती है। यह बाद में एच२जी२ (H2g2) के नाम से भी प्रसिद्ध है। १९८१ में इस पर टीवी श्रृंखला और डीसी कॉमिक्स ने पहली तीन उपन्यास में कॉमिक्स भी निकाली।
क्या आप जानते हैं कि इसकी सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति क्या है। नहीं मालुम न, चलिये मैं बताता हूं।
इसके प्रथम उपन्यास में, ब्रह्माण्ड के अत्यंत बुद्धिमान प्राणीगण जीवन का क्या मतलब है जानने के लिये अपने दो सबसे प्रबुद्ध प्राणियों को सुपर कंप्यूटर से अंतिम सवाल का, आखरी जवाब जानना के लिये नियुक्त करते हैं। कंप्यूटर उन्हें, ७५ लाख साल के बाद आने को कहता है। उस समय उसका जवाब होता है - ४२।
'उन्मुक्त जी, समझ में नहीं आया। वह आखरी सवाल क्या था। जिसका जवाब ४२ था।'
वह सवाल क्या था यह किसी को नहीं मालुम, बस जवाब ही मालुम है :-)
पहली कॉमिक का कवर
जब सुपर कंप्यूटर से पूछा जाता है कि आखरी सवाल क्या था, तब वह बताता है कि उसे उसका सवाल नहीं मालुम। लेकिन वह उससे भी अधिक शक्तिशाली कंप्यूटर (पृथ्वी) को बना सकता है। जिसके पास इसका जवाब हो। उसमें उन सब को, आदि-प्राणी की तरह जाना होगा। एक करोड़ साल बाद उसका जवाब मिल सकेगा। लेकिन जब उसका जवाब मिलने की बात होती है तब उसके ठीक ५ मिनट पहले पृथ्वी नष्ट हो जाती है।
वास्तव में, यह संख्या ४२ मज़ाक ही है। लेकिन इसे इस तरह देखें कि जिस दिन हमें आखरी सवाल और उसका जवाब मालुम चल जायगा। उस दिन हम इस ब्रह्माणड को जान लेंगे। फिर जीने का उद्देश्य ही समाप्त हो जायगा। वह जीवन का अन्त होगा।
'उन्मुक्त जी, कहानी तो कुछ रोचक लग रही है। क्या कुछ और प्रकाश डालेंगें।'
आपको ही नहीं, यह बहुतों को रोचक लगती है। यही कारण है कि यह बीसवीं शताब्दी के अन्तिम चतुर्थांश की सबसे प्रसिद्ध विज्ञान कहानियों में से है। इसी लिये ४२ संख्या बहुत से विज्ञान कहानी प्रेमियों को भाती है। यही कारण है कि वे लोग इस दिन शादी कर रहे हैं। जहां तक इसकी कहानी की बात है वह तो अरविन्द मिश्रा जी से ही पूछिये। याहू पर साइंस फिक्शन ग्रुप वह चलातें हैं कि मैं :-)
न तो मैं आज शादी कर रहा हूं न ही मेरी शादी आज हुई थी। मेरी शादी को तो जमाना गुजर गया। आज मेरी एक प्रिय भान्जी का जन्मदिन है। मैंने उसी के लिये यह चिट्ठी लिखी है।
इस पर फिल्म भी बनी यदि आप इसका वह भाग देखना चाहते हों, जहां पर कंप्यूटर सवाल का जवाब दे रहा है तब नीचे देखें।
हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi
सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।: Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. his will take you to the page where file is. Click where ‘Download’ and there after name of the file is written.)
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About this post in Hindi-Roman and English
is chitthi mein Douglas Adams kee likhi pustak 'The Hitchhiker's Guide to the Galaxy' kee charchaa ke saath aaj ke tareekh ke smbandh ke sameeksha hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.
This post is book review of 'The Hitchhiker's Guide to the Galaxy' by Douglas Adams talks about its connection with today's date. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.
यह चिट्ठी, साइबर अपराधों पर नयी श्रृंखला की भूमिका है।
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फिल्म 'इंडिपेंडेन्स डे' से
क्या आपको मालुम है कि आज किसका जन्म दिन है? मेरा तो नहीं है पर है किसी खास व्यक्ति का।
'उन्मुक्त जी, कौन है वह व्यक्ति? क्या चिट्ठकार है? ज्लदी बताइये, उसे बधाई तो दे दें।'
वह चिट्ठकार तो नहीं है, पर है एक महान व्यक्ति, एक महान तर्क शास्त्री है। मेरे विचार से आज तक हुऐ सारे तर्क शास्त्रियों में महानतम―नाम है उसका, कोर्ट गर्डल (Kurt Gödel)।
चित्र इंस्टिट्यूट ऑफ एडवान्सड स्टडीज़ की वेबसाइट से
कोर्ट गर्डल का जन्म २८ अप्रैल १९०६ में , बर्नो चेक रिपब्लिक (Czech Republic) में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ायी वियान ऑस्ट्रिया में पूरी की पर बाद में इंस्टिट्यूट ऑफ एडवान्सड स्टडीज़, प्रिंक्सटन चले गये। वहीं उनकी मृत्यु १४ जनवरी १९७८ में हो गयी।
'उन्मुक्त जी आपका शीर्षक तो है "तू डाल डाल, मैं पात पात” हम तो समझे कि यहां कुछ छकने, छकाने की बात होगी। लेकिन आप तो चालू हो गये तर्क शास्त्री कोर्ट गर्डल की बात करने। मालुम नहीं पहला चित्र क्या है, लगता है कि कहीं लड़ाई हो रही है। हमें तो आप "द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर" फिल्म की याद दिला रहे हैं। आपको याद है वह फिल्म। आप शीर्षक कुछ देते हैं, लिखने कुछ और लग जाते हैं।'
मुझे 'द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर' फिल्म की बहुत अच्छी तरह से याद है। यह १९६१ में बनी वॉल्ट डिज़नी की लोकप्रिय फिल्मों में से एक है। इसे मैंने चौथी या पांचवी कक्षा में पढ़ते समय देखा था।
कौन भूल सकता है उस प्रोफेसर को, जिसने भूल से, उड़ते रबर (flying rubber) (flubber) (फ्लबर) का आविष्कार कर लिया था। इसी रोमांच में वह अपनी शादी की तारीख भूल गया। बस, गुस्से में, उसकी मंगेतर ने शादी तोड़ दी और वह किसी अन्य से दोस्ती का दिखावा करने लगी। फिल्म में, फल्बर के साथ प्रोफेसर के रोमांचकारी किस्से और अपने प्यार को वापस पाने की कहानी है। कितनी प्यारी फिल्म थी, आज भी याद है।
यह फिल्म, सैमुएल टेलर की विज्ञान कहानी 'अ सिचुऐशन ऑफ ग्रैविटी' (A Situation of Gravity by Samuel W Taylor) नामक कहानी के ऊपर बनी है। इसके बाद १९६३ में वॉल्ट डिज़नी ने इसकी ऊत्तर कथा फिल्म 'सन ऑफ फल्बर' (Son of Flubber) बनायी। यह श्याम-श्वेत फिल्में थीं। कुछ साल पहले, 'ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर' को नये सिरे से रंगीन फिल्म फल्बर नाम से बनाया गया। मुझे याद है यह सब।
मैं बहुत कुछ हूं, मेरे चिट्ठियां इसकी गवाह हैं पर मैं भुलक्कड़ नहीं हूं। यह शीर्षक है, मेरी नयी श्रंखला का जो मैं साइबर अपराधों और कंप्यूटर हैकर के बारे में लिख रहा हूं। मैंने जानबूझ कर यह शीर्षक दिया है और 'इंडिपेंडेन्स डे' फिल्म का चित्र लगाया है।
'उन्मुक्त जी, अब समझ में आया कि आपने इस श्रंखला का नाम "तू डाल डाल, मैं पात पात" क्यों रखा। चोर-सिपाही के खेल में, अक्सर चोर सिपाही से एक कदम आगे रहते हैं। कंप्यूटर हैकर भी, कंप्यूटर विशेषज्ञयों से आगे रहते हैं। इसलिये आपने इस श्रंखला का यह नाम रखा है। है न सही?'
बिलकुल सही फरमाया आपने।
'क्या खाक सही फरमाया उन्मुक्त जी―पैर कब्र में जा रहे हैं लेकिन मज़ाक करने की आदत नहीं गयी। कोर्ट गर्डल या इस इस चित्र का, इस विषय से क्या समबंध। हमें बेवकूफ न बनाइये।'
मेरे भाई, मेरी बहना, इतनी जल्दी नहीं। न केवल कोर्ट गर्डल, पर फिल्म 'इंडिपेंडेन्स डे' (जिस फिल्म से ऊपर का चित्र चित्र लिया गया है) का सम्बन्ध, इस विषय है। यह कैसे है इसका पता तो आपको इस श्रृंखला के दौरान चलेगा। इंतजार कीजिये इस श्रंखला की अगली कड़ी का, लेकिन उसमें कुछ समय लगेगा। मैंने इस कड़ी को केवल इसलिये प्रकाशित कर दिया क्योंकि आज कोर्ट गर्डल का जन्मदिन था।
अगली बार हम बात करेंगे कि कोर्ट गर्डल क्यों प्रसिद्ध हैं, उनके बारे में कुछ चर्चा, और मुझे यह श्रृंखला लिखने का विचार कैसे आया।
फिल्म 'द ऐबसेन्ट माइंडेड प्रोफेसर' में प्रोफेसर की, अपनी मगेंतर से पुनः मित्रता हो जाने के बाद के कुछ दृश्य
स्कॉटस्बॉरो बॉयज़ ट्रायल में, ९ अश्वेत लोगों पर, श्वेत लड़कियों के साथ बलात्कार करने का मुकदमा ऍलाबामा राज्य में चला था। इस मुकदमे ने हार्पर ली पर असर डाला। उनके द्वारा लिखा उपन्यास, 'टु किल अ मॉकिंग बर्ड' इसी पर आधारित है। आज चर्चा करेंगे - इस उपन्यास की कहानी के बारे में और इसके एवं ली के वास्तविक जीवन में समन्वय को भी देखेंगे।
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने'
देखें।
ली, पुस्तक पर बनी फिल्म प्रॉड्यूसर के साथ - चित्र सौजन्य विकिपीडिया
हार्पर ली का जन्म २८ अप्रैल, १९२६ को ऍलाबामा राज्य में हुआ था। ऍलाबामा राज्य अमेरिका के दक्षिण में है उस समय दक्षिण और उत्तर अमेरिका में, अश्वेतों के बर्ताव में काफी अन्तर था। दक्षिण में नागरिक अधिकारों का उतना महत्व नहीं था। स्कॉटस्बॉरो बायॉज़ के मुकदमे के समय, ली छ: साल की थी। इस मुकदमे ने, उस के जीवन में बहुत कुछ असर डाला। 'टू किल अ मॉकिंगबर्ड' इसी अनुभवों के आधार पर लिखा उपन्यास है। यह कहानी १९३० के दशक की है। यह कहानी है एक बहन स्काउट, उसके भाई जेम और उनके मित्र डिल की।
स्काउट के पिता एटिक्स फिंच एक वकील हैं। बू रैडली उनके रहस्यमय पड़ोसी हैं। इसमें एक अश्वेत व्यक्ति पर एक श्वेत लड़की से बलात्कार का प्रयत्न करने के लिए मुकदमा चलता है। एटिक्स को बचाव पक्ष का अधिवक्ता नियुक्त किया जाता है। इस मुकदमे में यह सिद्ध हो जाता है कि अश्वेत व्यक्ति निर्दोष है और श्वेत लड़की को चोटें,उसके पिता ने ही पहुंचायी थी। फिर भी, अश्वेत व्यक्ति को सजा हो जाती है। इस मुकदमे के बाद श्वेत लड़की का पिता स्काउट और जेम को मारने का प्रयत्न करता है। उस समय बू रैडली जो कि अविवेकी के रूप में जाना जाता है उनकी जान बचाता है।
'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' फिल्म में एटिक्स की भूमिका में ग्रेगरी पेक और स्कॉट की भूमिका में मैरी बैधम
बहुत से लोगों का कहना है कि 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' हर्पर ली की जीवनी है पर वे इस बात को तो नकारती है पर यह भी स्वीकारती हैं कि उन्होंने जीवन में जो भी देखा, उसी को इस कहानी में उतारा है।
लोगों का कहना भी गलत नहीं है क्योंकि वास्तविक जीवन में भी ली का बड़ा भाई और मित्र था। उसके पिता भी वकील थे और शादी के पहले उनकी माँ का नाम फिंच था जो कि उपन्यास में इनका सर-नाम है। उपन्यास से में ली का मित्र डिल है और वास्तविक जीवन में उनके मित्र का नाम ट्रूमैन कापाटे था।
उसका पहले नाम ट्रूमैन स्ट्रेकफस परसॉनस् (Truman Streckfus Persons) था। ट्रूमैन, जब चार साल का था तभी उनके माता-पिता में तलाक हो गया। उसकी मां हमेशा अच्छा जीवन जीने की सोचा करती थी। लेकिन तलाक से वह टूट गयी। उसने ट्रूमैन को उनकी आंटी के पास, मॉनरोविले में भेज दिया। वह ली को पड़ोसी था। वहीं उसका लालन पालन हुआ। 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' में भी डिल दूसरी जगह से आता है।
ट्रूमैन की मां न्यूयार्क चली गयी जहां उसने दूसरी शादी कर ली। बाद में ट्रूमैन के सौतेले पिता ने उसे गोद ले लिया जिससे उसका नाम बदलकर ट्रूमैन कापाते हो गया।
'टु किल अ मॉकिंग बर्ड' जीवन के दर्शन को कुछ सरल वाक्यों में बताती है। अगली बार मिलेंगे तब इसी के बारे में बात करेंगें।
इस चिट्ठी में अमेरिका के लूज़िआना राज्य के साइंस एजूकेशन ऐक्ट, विलायती फिल्म 'क्रिएशन' और 'डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े' श्रंखला के निष्कर्ष की चर्चा है।
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें। यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम लिखा है वहां चटका लगायें। इन्हें डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।
न्यायालय से पटखनी खाने के बाद भी कट्टरवादियों ने हार नही मानी। वे किसी तरह से ऎसे कानून बनाने पर जोर दे रहे हैं जिससे कि लगे कि डार्विन का विकासवाद का सिद्वान्त गलत है। अमेरिका के ऎलाबामा (Alabama), फ्लोरिडा (Florida), मिशिगन (Michigan), मिसूरी (Missouri), और साउथ कैरोलाइना ( South Carolina) राज्यों में इस तरह के कानून लाये गये पर वे पास नहीं हो पाये और २००८ में मृत हो गये पर जून २००८ में, लूज़िआना राज्य में 'साइन्स एजूकेशन ऐक्ट' (Science Education Act) पारित किया गया है। यह पुन: विद्यार्थियों में सृजनवाद पढ़ाने के रास्ते खोल सकता है। इस अधिनियम की सारे वैज्ञानिकों ने निन्दा की है। अफसोस की बात यह है कि इसे भारतीय मूल के बॉबी ज़िन्दल ने हरी झंडी दी है।
डार्विन के जीवन पर इस साल एक नयी फिल्म 'क्रिएशन' (Creation) नाम से बनी है। इसमें डार्विन और उसकी पत्नी ऐमा की भूमिका, पॉल बेटॅनी और जेनिफर कॉनेली ने निभायी है जो कि वास्तविक जीवन में भी पति और पत्नी हैं। यह फिल्म अमेरीका में नहीं दिखायी जा रही है। वहां पर कोई भी फिल्म वितरक इसे वितरण के लिये नहीं लेना चाहता है। उन्हें डर है कि सृजनवादी इसके खिलाफ धरना देगें, प्रदर्शन करेंगे। इस फिल्म में एक जगह एक थॉमस हेनरी हक्सले डार्विन से कहता है
'All mighty can no longer claim to have authored every species under a week.
You have killed God, Sir'
लोग, डार्विन के सिद्धांत को इसी तरह से समझते हैं। इसलिये, यदि आप कट्टरवादी हैं तो आपको उसका सिद्धांत, यह फिल्म विवादास्पद लगेगी। इस चिट्ठी का शीर्षक मैंने इसी डायलॉग से लिया है। इस फिल्म का ट्रेलर देखिये - आपको पसन्द आयेगा। मैंने जिस डायलॉग की चर्चा की है वह भी इसमें है।
इस फिल्म में डार्विन और उसकी पत्नी ऐमा की भूमिका पॉल बेटॅनी (Paul Bettany) और जेनिफर कॉनली (Jennifer Connelly) ने निभायी हो जो कि वास्तविक जीवन में भी पति और पत्नी हैं।
चर्च आफ इंग्लैंन्ड ने, डार्विन के प्रति किये गये अन्याय पर माफ़ी मांग ली। उनका कहना है कि डार्विन के विकासवाद का सिद्धांत उनके मज़हब के विरूद्ध नहीं है। वे प्रयत्नशील है कि किसी तरह यह लड़ाई समाप्त हो पर कट्टरवादी कहीं भी हो, किसी भी धर्म के हों, जब वे हाथ से बाहर निकल जाते है तो किसी की भी नहीं सुनते हैं। क्या वे तर्क को, सबूतों को, विज्ञान को समझेंगे या फिर क्ट्टरवादिता, विज्ञान पर विजय प्राप्त कर लेगी? क्या क्रिएशन फिल्म अमेरिका में प्रदर्शित हो पाएगी? लगता नहीं कि ऐसा हो पायेगा :-(
'उन्मुक्त जी यह आप कैसे कह सकते हैं?'
मैं तो यह ब्रिटिश काउंसिल (British Council) की प्रार्थना पर इप्सॉस मोरी (Ipsos MORI) के द्वारा डार्विन के ऊपर किये गये सर्वे के कारण कहता हूं। इसका डाटा आप यहां से डाउनलोड कर सकते हैं। इसका कुछ अंश मैं यहां प्रदर्शित कर रहा हूं।
१
२
३
४
देश
विकासवाद वैज्ञानिक तथ्य हैं हां/ नहीं
विकासवाद और ईश्वर - दोनो सम्भव
विकासवाद अन्य सिद्धान्तों के साथ
अर्जेनटीना
४४/ ७
६२
२३/ ६५
चीन
५५/ ७
३९
१९/ ४२
मिस्र
८/ १९
४५
१८/ १
इंगलैंड
५१/ ७
५४
२१/ ५४
भारतवर्ष
३८/ २
८५
३७/ ४०
मेक्सिको
५२/ ९
६५
२८/ ५६
रूस
३९/ ८
५४
१०/ ५३
द. अफ्रीका
८/ ४
५४
११/ २९
स्पेन
३९/ ५
४६
३४/ ३१
अमेरिका
३३/ २४
५३
२१/ ५१
यह चार्ट प्रतिश्त में है। इससे पता चलता है कि यद्यपि 'विकासवाद के लिये वैज्ञानिक तथ्य हैं' (कॉलम १) का प्रतिशत 'विकासवाद के लिये वैज्ञानिक तथ्य नहीं हैं' से केवल मिस्त्र (Egypt) को छोड़ कर बाकी देशों में ज्यादा है फिर भी 'ईश्वर एवं विकासवाद पर एक साथ विश्वास किया जा सकता है' (कॉलम २) से कम है और 'विकासवाद व अन्य सिद्धान्त पढ़ाये जाने चाहिये' (कॉलम ३) का प्रतिशत 'केवल विकासवाद पढ़ाया जाना चाहिये' के प्रतिशत से, स्पेन को छोड़, सब देशों में अधिक है।
कहावत है कि झूट, होता है, फिर सफेद झूट , फिर सांख्यिकी - आंकड़े अक्सर गलत बताते हैं। ईश्वर करे कि यह सही हो :-)
ऐसे खबर है कि भारतीय और चीनी विद्यार्थियों को सृजनवाद भा रहा है। विश्वास नहीं, तो अन्तरजाल पर घूम रहा कार्टून देखिये।
आज दिवाली है - विजय का त्योहार: ज्ञान की अज्ञानता पर, धर्म की अधर्म पर, रोशनी की अंधकार पर - इसी पर्व पावन पर यह श्रंखला इस आशा के साथ समाप्त होती है कि विज्ञान की धार्मिक कट्टरता पर विजय होगी। आपको दीपवली शुभ हो।
कौन ... कहता है कि हमारे और बन्दरों के पूर्वज एक थे देखिये हममें कितना अन्तर है।
यह चित्र मेरा नहीं है। इस श्रंखला के दौरान किसी ने यह चित्र भेजा है। यदि इसके कॉपीराइट स्वामी को आपत्ति हो तो मैं चित्र को हटा दूंगा।
मैं बहुत जल्दी आपको दो नयी श्रंखला में ले चलूंगा। पहली में हम बात करेंगे एक ऐसे उपन्यास और उससे जुड़ी कहानियों के बारे में है जो न केवल २०वीं शताब्दी के उत्कृष्ट अमेरिकन साहित्य में गिना जाना जाता है पर, मेरी बिटिया रानी के अनुसार, जिसे अमेरिका के कॉलेज जाने वाले प्रत्येक विद्यार्थी ने कम से कम एक बार पढ़ा है और दूसरी में, मैं आपको देव भूमि हिमाचल की यात्रा में ले चलूंगा।
'बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां' इस बार चर्चा का विषय है किसी बड़ी उल्का या छुद्र ग्रह के पृथ्वी से टकराने की कल्पना करते हुऐ लिखी गयी विज्ञान कहानियां (science fiction) और विज्ञान फिल्में (sci-fi film)। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।
बड़ी उल्का (meteor) या छुद्र ग्रह (asteroid) के टकराने के बारे में सबसे प्रसिद्घ विज्ञान उपन्यास आर्थर सी क्लार्क ने (Arthur C. Clarke) ने द हैमर ऑफ गॉड (The hammer of God) नाम से 1993 में लिखा है।
इस उपन्यास में काली नाम का छुद्र ग्रह पृथ्वी से टकराने वाला होता है। यह नाम हिन्दू सभ्यता की देवी काली पर रखा गया है। क्लार्क, श्री लंका में रहते थे और हिन्दू सभ्यता के जानकार थे। वे अक्सर अपनी कहानियों में हिन्दू देवी देवताओं के नामों का प्रयोग करते थे। इसमें गोलियथ नाम का जहाज है, जिसके कप्तान रॉबर्ट सिंह हैं। इस जहाज को, छुद्र ग्रह को, पृथवी के रास्ते से हटाने के लिए भेजा जाता हैं। यह हो पाता है कि नहीं, यही इस कहानी में है।
इस कहानी पर फिल्म बनाने के अधिकार को स्टीवन स्पीलबर्ग (Steven Spielberg) ने खरीद लिया था। उन्होंने १९९८ में एक फिल्म डीप इम्पैक्ट (Deep Impact) बनायी पर इस फिल्म की कहानी इस उपन्यास से कुछ भिन्न है और उसमें क्लार्क को भी कोई श्रेय नहीं दिया गया है।
आर्मगेडन बेहतरीन फिल्म है, अवश्य देखें
इसी साल इसी तरह के प्रसंग पर एक और फिल्म आर्मगेडन (Armageddon) नाम से बनी है। मुझें इन दोनो फिल्मों में आर्मगेडल ज्यादा अच्छी लगी।
फिल्म आर्मगेडन, मानविक भावनाओं को बेहतरीन तरीके से दिखाती है। यह कहानी है एक पिता पुत्री के प्रेम की, उसके त्याग की पति पत्नी के रिश्ते की, पिता थे उसके जवान होते बेटे के साथ रिश्तों की। यह बेहतरीन फिल्म है यदि नहीं देखी तो अवश्य देखें। यह आपकी आखों में आंसुओं को भी लायेगी और इसके साथ खुशी भी देगी।
आर्मगेडन शब्द ईसाई धर्म से जुड़ा है। आर्मगेडन फिल्म की कहानी उस दृष्टांत से प्रेरित है। मैं चाहूंगा कि शास्त्री जी इस शब्द के बारे में हम सब को विस्तार से बतायें।
इस फिल्म का ट्रेलर यहां देखें
क्लार्क ने एक विज्ञान कहानी राम से मिलन (रांडवू विथ राम) (Rendezvous with Rama) (1972) नाम से लिखी है। इसमें एक पिंड पृथ्वी की तरफ आ रहा होता है। पहले इसे, एक छुद्रग्रह समझ लिया जाता है पर यह वास्तव में एक किसी अन्य सौर मंडल से आया स्टारशिप है। यह पहले पृथ्वी की तरफ आ रहा था बाद में सूरज की तरफ चला जाता है। इस उपन्यास को ह्यूगो तथा नेब्यूला पुरूस्कार मिल चुका है।
यह नाम भारतीय भगवान राम पर है और यह नाम इसलिये रखा गया क्योंकि उपन्यास में इसका पता, सीता (SITA) नामक स्पेस प्रोब (Space probe) से चला था।
क्लार्क ने इसके बाद कुछ और पुस्तकें इस उपन्यास के बाद की कहानी (Sequel) के रूप में लिखीं। यह उपन्यास है।
कुछ लोग कहते हैं की बेथलेहम का तारा एक धूमकेतु था और वे इसे हैली के धूमकेतु से जोड़ते हैं। इस श्रंखला की आने वाली कड़ियों में हम धूमकेतु या पुच्छल तारे के बारे में चर्चा करेंगे, कुछ बात करेंगे प्रसिद्ध धूमकेतुओं की, और गौर करेंगे कि क्या बेथलेहम का तारा धूमकेतु हो सकता है। इसी के साथ नजर डालेंगे धूमकेतु से संबन्धित कुछ विज्ञान कहानियों पर भी।
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This post talks about science fiction and films based on meteor, asteroid and earth. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.