सक्रिय हिन्दी चिट्ठे और पॉडकास्ट

मैं हिन्दी पॉडकास्ट और चिट्ठों के बारे में एक लेख लिखने के सम्बन्ध में कुछ सुचनाये एकत्रित कर रहा हूं। यह उन सब हिन्दी चिट्ठों की लिस्ट है जिन पर ३० जून के बाद पोस्ट हुई हैं चाहे वे नारद पर आते हों या नहीं। इनमे से कुछ नारद पर नहीं आते हैं। इस लिस्ट में निम्न तरह के चिट्ठे नहीं हैं:
  • जिनमें कम से कम एक पोस्ट ऐसी है जिस पर एक भी वाक्य हिन्दी में नहीं है; या
  • जो किसी और जगह चले गये हैं; या
  • सक्रिय नहीं हैं; या
  • अपने पूर्ण हैं जैसे कि कोई किताब वगैरह हो ओर उनमें अब कुछ नया नहीं आना है; या
  • वे किसी और वेब साईट के बारे में बताते हैं।
यदि इसमें किसी का नाम छूट गया हो तो टिप्पणी द्वारा बता दें। आप अपने चिट्ठे या अन्य चिट्टों की नविनतम पोस्टें यहां, यहां, यहां, और यहां देख सकते हैं। हांलाकि इन पर नविनतम पोस्ट आने के लिये एक से दो दिन लग सकता है।


हिन्दी पॉडकास्ट

क्रम संख्या

नाम


बकबक


हिन्दी चिट्ठे

क्रम संख्या

नाम


A Journey


An Inner Voice


archnaakhyan


arvind das


Bhaat baaji


CHANBAL KI AWAZ


Chayachitrakar - छायाचित्रकार


e.chhatisgarh


fully time pass


HIndi Blog


HIndi Blog: हिन्दी ब्लाग


Hindi Podcasts and Blogs-1


Hindi Poetry Collection


Hum Hindi Blog


Imagination World :: कल्पना कक्ष


INDIA GATE


Indian Humour


Jagjit Singh


JHAROKHA


kavyakala


Latest entries from ashoka.blog-city.com


Mahashkti


magic-I


merihindi


My Hindi Blog: मेरा हिन्दी चिट्ठा


My Images


My Poems


Rants / प्रवचन


RATNA'S RECIPES


Raviratlami Ka Hindi Blog


Reflection|अंखियों के झरोखों से


Timepass: समय नष्ट करने का एक श्रेष्ठ साधन


world from my eyes - दुनिया मेरी नज़र से!!


YogBlog


♥ अभिव्यक्ति ♥


अक्षरग्राम


अंतर्मन


अनहद-नाद


अनुभव


अनुभूति कलश


अमिताभ बच्चन


अल्प विराम


आइए हाथ उठाएं हम भी


आईना


आज की बात


इधर उधर की


इन्द्रधनुष


ई-लेखा


ई-स्वामी


उडन तश्तरी ….


उत्तरांचल


उन्मुक्त


एक अकेला इस शहर मे


एक और नज़रिया ..::.. Anderer Standpunkt


एक शाम मेरे नाम


कचराघर Recycle Bin


कतरनें (snippets)


कल्पतरु


कल्पना कक्ष


काव्यगगन( kavyagagan)


की बोर्ड के सिपाही


कुछ बून्दें, कुछ बिन्दु


कुलबुलाहट


खबरिया : लेगा सबकी खबर


खाली-पीली


खुशी की बात


गजल की दुनिया में


गपशप इंडिया


गर्म चाय


गीत कलश


चिठ्ठा चर्चा


चिन्तन


चौपाल


छाया (shadow)


छुट-पुट


जमाना हिन्दी कंप‍यूटिन्ग का


जयप्रकाश मानस


जलते हुए मुद्दे


जुगलबन्दी..


जो देखा भूलने से पहले : मोहन राणा : Mohan Rana


जो न कह सके


जोगलिखी


झरोखा


ठेले पे हिमालय


डॉ॰ जगदीश व्योम


तत्वज्ञानी के हथौडे


तिरछी नजरिया


दर्पण।The Mirror


दस्तक


दिल के दरमियाँ


दिल मांगे मोर


दिल्ली ब्लॉग


देश-दुनिया


दैनन्दिनी


निठल्ला चिन्तन


निनाद गाथा


नुक्ताचीनी


नौ दो ग्यारह


पंखुड़ी


पलाश


पहला पन्ना


पाठशाला :: My Class


पिटारा भानुमती का


प्रियम


पूंजी बाजार


प्रतिभास


प्रतिमांजली


प्रत्यक्षा


प्रभाकरगोपालपुरिया


~ प्रेमपीयूष ~


फ़ुरसतिया


बसेरा


बिहारी बाबू कहिन


भारतीय सिनेमा


भावनायें …….


मटरगशती


मंतव्य


मन


मन की बात


मसिजीवी


महावीर


महाशक्ति कविता संग्रह


मानसी


माफ करना,लेकिन


मालव संदेश


मिर्ची सेठ


मीरां बाई के भजन


मुक्त जनपद


मुझे कुछ कहना है …..


मुझे भी कुछ कहना है…..


मुन्ने के बापू


मेरा चिट्ठा


मेरा पन्ना


मेरी कविताएँ


मेरी कृति


मेरे कवि मित्र


मेरी दुनिया


मेरे कैमरे से : Through My Lenses


यथार्थ


रचनाकार


रजनीगन्धा


रतीना


रत्ना की रसोई


राग- हिन्दी में


रोजनामचा


लखनवी


लाइवजर्नल हिन्दी में


लेख


लेखनी


वन्दे मातरम्


वाह मीडिया! हिंदी ब्लॉग by Balendu Sharma Dadhich


विज्ञान विश्व


वेदना


॥शत् शत् नमन॥


शंख सीपी रेत पानी


शब्दायन


शर्मा होम - Sharma Home


शुऐब


शेर शायरी


श्रीमद्भगवद्गीता


संगीत


समन्वय ….


समाजवादी जनपरिषद


समाजवादी जनपरिषद- उत्‍तर प्रदेश


सर्वे सुखिनः सन्तु।


सृजन शिल्पी


सृजन-गाथा


सेहर


हिंदिनी


हिंदू जागरण


हिन्दी


हिन्दी की बात


हिन्दी साहित्य


हिन्दी साहित्य


हृदयगाथा


होम्योपैथी-नई सोच/नई दिशायें

हरिवंश राय बच्चन - इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय के अध्यापक

पहली पोस्ट: हरिवंश राय बच्चन – विवाद
दूसरी पोस्ट: हरिवंश राय बच्चन - क्या भूलूं क्या याद करूं
तीसरी पोस्ट: हरिवंश राय बच्चन – तेजी जी से मिलन
यह पोस्ट: हरिवंश राय बच्चन - इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय के अध्यापक

बीसवीं शताब्दी में इलाहाबाद विश्वविद्यालय Oxford of East के नाम से जाना जाता था - भारतवर्ष का सबसे अच्छा विश्‍वविद्यालय। इस विश्‍वविद्यालय एक फिलोसफी विभाग के अध्‍यापक के बारे में बच्चन जी ने ‘क्या भूलूं क्‍या याद करूं’ में लिखा था। इसका जिक्र भी मैंने इस विषय की दूसरी पोस्ट पर किया है। बच्चन जी इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फिर से अंग्रेजी में पढ़ाई पूरी करने गये। 'नीड़ के निर्माण फिर' में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पुनः पढ़ाई वा उन्हें कैसे वहां नौकरी मिली की कथा बताते हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के दो प्रसिद्ध अध्यापक अमर नाथ झा और एम.सी. देव के बारे में बताते हैं।
‘पंडित अमरनाथ झा अंग्रेजी-साहित्‍य का इतिहास और शेक्सपियर पढ़ाते थे। साहित्य के इतिहास पर उनका एक व्याख्यान प्रति सप्ताह होता था और उसमें बी.ए. कें लड़के भी आकर बैठ सकते थे-विभाग के बीचोंबीच वाले सबसे बड़े हाल में, जिसमें अपराहन में ^ला’ के क्लास होते थे। शेक्सपियर वाला क्लास वे अपने कमरे में लेते थे। हाजिरी लेने में वे अपना वक्त नहीं खराब करते थे । लड़के उनके क्लास में पहुंचे, उन्होंने एक नजर सब पर दौड़ाई, रजिस्टर खोला और अनुपस्थित लड़कों के नाम के आगे बिन्दी धर दी। किसी प्रकार का नोट हाथ में लेकर पढ़ाते मैंने कभी न देखा था; प्रो.एस.सी. देब को भी यह कमाल हासिल था, पर दोनों में जमीन-आसमान का अन्तर था। झा साहब जब किसी विषय पर व्याख्यान देने लगते तो महसूस होता थ कि आप एक ऐसी नाव में बैठे हैं जिसकी पतवार ठीक दिशा में लगी हुई है और जिसका खेवनहार नाव को समगति से खेता आपको ४५ मिनट के निश्चित घाट पर उतार देगा। देब साहब की नाव में न पतवार होती थी न डांड़ । वह शब्दों के तूफान में डगमग डोलती कभी कभी दाएं-बाएं, कभी आगे, और कभी पीछे भी खिंचती, किसी भी जगह जाकर टकरा सकती थी।‘

एक साल गर्मियों में बच्‍चन जी तेजी जी के साथ झा साहब के साथ मसूरी में रहे। उसके अनुभव पर बच‍चन जी कहते हैं कि,
‘झा साहब के साथ कोई कितने ही दिन रहे, उनसे निकटता का अनुभव नहीं कर सकता था। वे अपने भीतर कहीं बहुत एकाकी, स्वकेन्द्रित और स्वयं-पर्याप्त थे। वे यह तो चाहते थे कि उनके आस-पास लोग रहें पर अपने निकट वे किसी को न आने देते थे। झा साहब में बहुत गुण थे, पर वे अच्छे मेजबान नहीं थे। धर्मशाला और घर रहने में कुछ अन्तर का अनुभव तो होना चाहिए। उनके घर में सब-कुछ ठंडा-ठंडा सा था ! हृदय की गर्माहट की प्रतीति कहीं नहीं होती थी।

कैसे अनासक्त भाव से रहता था वह शख्स! सुबह से शाम तक सारे काम बिना किसी घबराहट के, थकावट के, बिना किसी शिकवा-शिकायत के, कर्तव्य की गरिमा से करते जाना रोज-ब-रोज, माह-ब-माह, साल-ब-साल। इतना जब्त करने वाला, इतना अपने को जाब्ते में रखने वाला मैंने दूसरा आदमी नहीं जाना।‘

अगला सप्ताह हिन्दी सप्ताह है - १४ सितम्बर हिन्दी दिवस है तब बात करेंगे हरिवंश राय बच्चन के अंग्रेजी भाषा के विचारों के बारे में।

अन्य चिट्ठों पर क्या नया है इसे आप दाहिने तरफ साईड बार में, या नीचे देख सकते हैं।
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...