रात नशीले है

मुन्ने की मां भी मेरे साथ गोवा में थी। होटल समुद्र के किनारे था। मैंने होटेल के कमरे की खिड़की से पर्दा हटाया तो देखा समुद्र के किनारे विदेशी धूप सेंक रहे हैं। बहुत सारी महिलायें भी थी। इसी नजारे को देख कर मैंने अपनी चिट्ठी प्यार किया तो डरना क्या में दूसरी बात लिखी थी। मैं तन्मयता से खिड़की से बाहर देख रहा था कि तभी मुन्ने की मां भी आ गयी बोली
'क्या देख रहे हो।'
मैंने कहा,
'समुद्र और क्या।'
वह
बोली,
'मैं जानती हूं कि तुम क्या देख रहे हो, खींचो पर्दा।'
मरता क्या न करता, पर्दा खींचना पड़ गया। उसने मेरे हाथ से कैमरा छीन लिया। कहा उधर कुर्सी पर बैठो, मैं चित्र खींचती हूं। देखिये कमरे की खिड़की से यह चित्र उसी खींचा है। क्या बेकार है? बाद में भी कैमरा उसी हाथ रहा सारे चित्र उसी के खींचे हुऐ हैं :-(

होटल में जगह जगह क्या बढ़िया बार थे और सब तरह के पीने का समान। पर मुन्ने की मां जो मुझसे चिपकी, बस साये की तरह लगी रही। सब मजा चला गया। अगली बार तो मैं अकेले ही आऊंगा। मैं यह कर सकता हूं। आपको मालुम होना चाहिये घर का बॉस मैं हूं और मुन्ने की मां ने, मुझे यह सबसे बताने की अनुमति दे रखी है।

अधिकतर भारतीय लोग अपने परिवार के साथ थे। बस हम ही दो लोग गोवा में थे। हमारे बच्चों के पंख निकल आये हैं। वे अपना घर बसा कर, हमारे बसेरे से दूर, अपना बसेरा ढ़ूढ़ने, सात समुन्दर दूर निकल गये हैं। रेस्तरां में, दोपहर के खाने पर बैंड बज रहा था। मैंने हिन्दी गाना सुनाने की प्रार्थना की, तो उसने मना कर दिया। वहां पर बहुत से विदेशी थे। इसलिये वे लोग या तो अंग्रेजी के गाने गाते थे या फिर कोंकणी के।

मेरे अनुरोध पर बैंड ने कोंकनी में एक गीत सुनाया। यह कुछ 'पुकारता, चला हूं मैं' की धुन में था। उसने बताया कि यह एक प्रेम गीत है। मेरे विद्यार्थी जीवन में बीटल बहुत लोकप्रिय हुआ करता था मैंने उनसे बीटल का कोई गाना सुनाने को कहा। उन्होने
'I want to hold your hand'
सुनाया। उनका यह गाना शायद सबसे चर्चित गाना है। शादी के ३० साल बाद मैं और मुन्ने की मां अपने दूसरे हनीमून पर थे - केवल हमीं नहीं, वहां पर सब।

रात को सम्मेलन के लोगों का खाना अलग जगह समुद्र के किनारे था। खाने की जगह पर जाने लगा तो एक जगह शतरंज की बाजी बिछी थी। मैं इसे देखने लगा तो एक विदेशी महिला की आवाज सुनायी पड़ी,
'If I knew chess then I would have played chess with you.'
मैंने मुड़ कर देखा तो बार में एक विदेशी दम्पत्ती, बार का मजा ले रहे थे। महिला ने मुझे अपना नाम ब्रेन्डा बताया। मैंने कुछ देर उन लोगों से बात की, फिर चल दिया खाने पर।
Brenda, it was a pleasure to meet you. You have promised that you will learn chess and we will play, when we meet again.
खाना दूर समुद्र के किनारे था। वहां एक ग्रुप गाना गा रहा था। धुन मस्तानी थी पर गाना समझ में नहीं आ रहा था, शब्द कुछ अजीब से इस प्रकार लगते थे
रात नशीले है
मस्त जैंहां है
रूप तेरा मास्ताने

फिर समझ में आया, यहां केवल भारतीय थे। इसीलिये बैंड हिन्दी पिक्चर आराधना का गाना गा रहे थे।

अगली बार 'सुहाना सफर और यह मौसम हसी' में भाग लेते हैं नच बलिये में और मिलते हैं छम्मक-छल्लो से।

देखिये, मैंने यह कभी नहीं कहा था कि मैं दूसरी बात के लिये फोटुवें दिखाउंगा जैसा कि चिट्ठाचर्चा में
यहां मान लिया गया है। मैंने तो केवल यह कहा था कि मैं सब सच सच बता दूंगा कि वहां मेरे साथ क्या हुआ। मुझे डर यह था कि कहीं आप लोग मुझे बीबी से डरने वाला समझ कर, मेरे चिट्ठे का बहिष्कार न करने लग जांय। आप खुद इस विषय पर दूसरी 'परशुराम की शनती' वाली चिट्ठी में पढ़ लीजये कि मैंने क्या कहा था।

आज की दुर्गा: महिला दिवस

मेरी पिछली चिट्ठी प्यार किया तो डरना क्या पर जीतेन्द्र जी कि टिप्पणी,
'गोवा की याद करा कर, लेख लिखने के लिए उकसा दिया आपने। अब झेलिएगा लेख।'
मैं उनके गोवा यात्रा के लेखों का इंतजार कर रहा हूं, देखना है कि उनका अनुभव मेरे अनुभव जैसा ही रहा या फिर अलग था।

जीतेन्द्र जी ने टिप्पणी करते समय यह की यह बात भी कही कि
'आप डिसाइड नही कर पाए कि होटल पर लिखे या लीनिक्स पर'।
यह बात कुछ करोंच सी गयी। लगता है, मेरे दिमाग में ओपेन सोर्स और लिनेक्स कुछ ज्यादा ही घूमता रहता है। मुझे इससे बाहर आना चाहिये - गेयर बदलना चाहिये। महिला दिवस अभी ही गुजरा है, इसलिये सोचा कि मैं महिला अधिकारों के ऊपर नयी श्रृंखला की शुरुवात करूं। यह श्रृंखला लम्बी चलेगी और गेयर अपने आप बदल जायग। पहला प्यार तो भूलना मुश्किल होता है फिर भी, महिलाओं को दिमाग में रखूंगा तो शायद भूल पाऊं :-)

दुर्गा, शक्ति का रूप हैं। इतनी शक्तिमान कि भगवान राम ने भी लंका पर आक्रमण के समय, दुर्गा की आराधना की। उनकी कथा कुछ ऐसी है कि जब देवता, महिषासुर से संग्राम में हार गये और उनका ऐश्वर्य, श्री और स्वर्ग सब छिन गया तब वे दीन-हीन दशा में वे भगवान के पास पहुँचे। भगवान के सुझाव पर सबने अपनी सभी शक्तियॉं (शस्त्र) एक स्थान पर रखीं। शक्ति के सामूहिक एकीकरण से दुर्गा उत्पन्न हुई। पुराणों में उसका वर्णन है - उसके अनेक सिर हैं, अनेक हाथ हैं। प्रत्येक हाथ में वह अस्त्र-शस्त्र धारण किए हैं। सिंह, जो साहस का प्रतीक है, उसका वाहन है। ऐसी शक्ति की देवी ने महिषासुर का वध किया। वे महिषासुर मर्दनी कहलायीं।

मेरे विचार से यह कथा संघटन की एकता का महत्व बताने के लिये बतायी गयी है। शक्ति, संघटन की एकता में ही है। उनके सहस्त्र सिर और असंख्य हाथ, वास्तव में संघटक के सहस्त्रों सिर और असंख्य हाथ हैं। कथा की शिक्षा है - साथ चलोगे तो हमेशा जीत का सेहरा बंधेगा। देवताओं को जीत तभी मिली जब उन्होने अपनी ताकत एकजुट की। मैं अवधिया जी प्रार्थना करूंगा कि वे विस्तार से दुर्गा की कथा हम सबको बतायें।

दुर्गा, शक्तिमयी हैं, उनका सशक्तिकरण हो चुका है। लेकिन आज की महिला क्या शक्तिमयी है? क्या उसका सशक्तिकरण हो चुका है? क्या वह आज दुर्गा बन चुकी है? शायद नहीं, पर उसके पास कुछ अधिकार तो हैं, वह कुछ तो शक्तिमान हुई। यह अधिकार, यह शक्तियां उसे किसी ने दिये नहीं हैं। यह उसने खुद लड़ कर प्राप्त किये हैं। इस श्रृंखला में हम नजर डालेंगे उन किस्से कहानियों पर, उन कानून पर, उन फैसलों पर, जिन्होने महिला अधिकारों को सुदृढ़ किया और उसे कुछ हद्द तक दुर्गा का रूप दिया। पर सबसे पहले कुछ बातें इस महिला दिवस के बारे में।

महिला दिवस ८ मार्च को क्यों मनाया जाता है?
अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आवाहन, यह दिवस सबसे पहले सबसे पहले यह २८ फरवरी १९०९ में मनाया गया। इसके बाद यह फरवरी के आखरी इतवार के दिन मनाया जाने लगा। १९१० में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन के सम्मेलन में इसे अन्तरराष्ट्रीय दर्जा दिया गया। उस समय इसका प्रमुख ध्येय महिलाओं को वोट देने के अधिकार दिलवाना था क्योंकि, उस समय अधिकर देशों में महिला को वोट देने का अधिकार नहीं था।

१९१७ में रुस की महिलाओं ने, महिला दिवस पर रोटी और कपड़े के लिये हड़ताल पर जाने का फैसला किया। यह हड़ताल भी ऐतिहासिक थी। ज़ार ने सत्ता छोड़ी, अन्तरिम सरकार ने महिलाओं को वोट देने के अधिकार दिये। उस समय रुस में जुलियन कैलेंडर चलता था और बाकी दुनिया में ग्रेगेरियन कैलेंडर। इन दोनो की तारीखों में कुछ अन्तर है। जुलियन कैलेंडर के मुताबिक १९१७ की फरवरी का आखरी इतवार २३ फरवरी को था जब की ग्रेगेरियन कैलैंडर के अनुसार उस दिन ८ मार्च थी। इस समय पूरी दुनिया में (यहां तक रूस में भी) ग्रेगेरियन कैलैंडर चलता है। इसी लिये ८ मार्च, महिला दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

समय की कहानी, कैलेंडरों में अन्तर यह भी बहुत मजेदार किस्सा है। यह कभी मैं विस्तार से आपको सुनाऊगां। पर मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप में से कोई इसकी कहानी लिखना शुरु करे।

महिलाओं के अधिकारों की बात करते समय एक शब्द Gender Justice प्रयोग होता है। इस शब्द के अर्थ अलग अलग समय पर, अलग अलग देश में अलग अलग रूप में जाने जाते हैं। चलिये अगली बार हम बात करेंगे इस शब्द के अर्थ की और जानेगे, कि हमारे देश इस समय यह किस अर्थ में लिया जाता है।

मैं नहीं जानता कि Gender Justice के लिये हिन्दी में क्या उपयुक्त शब्द है। शब्दार्थ के अनुसार से तो यह लिंग न्याय होता है पर क्या यह सही है? मुझे प्रसन्नता होगी यदी आपमें से कोई इसके लिये सही शब्द बताये।


महिला दिवस के बारे में विस्तार से जानकारी यहां और यहां देखी जा सकती है।

यदि आप, इस चिट्ठी को पढ़ने के बजाय, सुनना पसन्द करें तो इसे मेरी 'बकबक' पर यहां क्लिक करके सुन सकते हैं। यह ऑडियो क्लिप, ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
  • Windows पर कम से कम Audacity एवं Winamp में;
  • Linux पर लगभग सभी प्रोग्रामो में; और
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity में,
सुन सकते हैं। मैने इसे ogg फॉरमैट क्यों रखा है यह जानने के लिये आप मेरी चिट्ठी 'पापा, क्या आप उलझन में हैं' पर पढ़ सकते हैं।

अन्य चिट्ठों पर क्या नया है इसे आप दाहिने तरफ साईड बार में, या नीचे देख सकते हैं।
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...