मैंने उसे थूकते हुऐ देखा है

विकासवाद का क्या सबूत है, मिसिंग लिंक कहां है - इस चिट्ठी में इसी की चर्चा है।

इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें। यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम लिखा है वहां चटका लगायें। इन्हें डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।


सृजनवादियों की मुख्य आपत्ति है, 
  • यदि कभी मानव और बन्दर  के पूर्वज एक थे तो उसका कोई सबूत होना चाहिये।  
  • इस तरह का कोई सबूत नहीं है। 
इसलिए विकासवाद के सिद्धांत पर विश्वास नहीं  किया जा सकता है।


लेकिन सच तो यह है कि यह लोग सबूत देखना नहीं चाहते है। इन लोगों ने अपनी आंखों में पट्टी बांध रखी है। विकास करोड़ो साल में होता है उसे एक जीवन में देख पाना नामुमकिन है पर यदि आप किसी वस्तु को देख नहीं सकते तो क्या वह सच नहीं हो सकती। किसने देखा है कि पृथ्वी सूरज के चारों तरफ घूमती है। इसका मतलब यह नही कि यह सच नहीं है। 


अलग-अलग जगह पाये गये जीवाश्म (fossils), विकासवाद के सबूत हैं। यह सबूत पुरा-जीवाश्म संग्रहालय में देखे जा सकते है। यह स्पष्ट रूप से बताते हैं कि किस तरह से सारे प्राणी जुड़े है। डीएनए टेस्टिंग से भी पता चलता है कि प्राणि-जगत आपस में जुड़ा है।


किसी भी चीज की उम्र का वैज्ञानिक पता लगाने का तरीका कार्बन डेटिंग  कहलाता है। यह बताता है कि पाये गये जीवाश्म उस समय से कहीं पुराने है जैसा कि कई मज़हबो में बताया जाता है।

आप मेरी बात पर विश्वास नहीं करते। देखिये जाने माने जीव विज्ञानी रिचार्ड डॉकिंगस् और वेन्डी राइट ईसाई धर्म की महिला प्रचारक के बीच बातचीत। इसी विडियो के ऑडियो का कुछ भाग मैंने अपने पॉडकास्ट में जोड़ा है।

 

इस विडियो में डॉकिंगस् बता रहे हैं कि व्हेल, डॉलफिन‌, और दरियायी घोड़ा किस तरह से जुड़े हैं और उनके बीच के क्या सबूत हैं।



स्टीव मिर्स्की (Steve Mirsky) ने, जून २००९ की साईंफिक अमेरिकन (Scientific American) में, एक लेख Are Dog Breeds Actually Different Species? नाम से लिखा है। वे कुत्तों की प्रजातियों का संदर्भ देते हुऐ मनमौजी तरीके से विकासवाद की बात करते हैं।  सृजनवादियों की इस आपत्ति की तुलना एक मुकदमें से करते हुऐ लिखते हैं,



यह चित्र  साईंफिक अमेरिकन के उसी लेख से है

'The claim makes me think of the trial where a man was charged with biting off another man’s ear in a bar fight. An eyewitness to the fracas took the stand. The defense attorney asked,
“Did you actually see with your own eyes my client bite off the ear in question?”
The witness said, “No.”
The attorney pounced:
“So how can you be so sure that the defendant actually bit off the ear?”
To which the witness replied,
“I saw him spit it out.”
We have the fossils, the intermediate forms, the comparative anatomy, the genomic homologies—we’ve seen what evolution spits out.'
एक बार एक व्यक्ति पर शराब खाने में हुई लड़ाई में दूसरे व्यक्ति के कान काटने के जुर्म पर मुकदमा चल रहा था। जब चश्मदीद गवाह ने गवाही देना शुरू किया तब बचाव पक्ष के वकील ने पूछा,
"क्या तुमने मेरे मुव्वकिल को कान काटते देखा?"
चश्मदीद गवाह ने इसका उत्तर नहीं में दिया। इस पर बचाव पक्ष के वकील ने पूछ फिर तुम कैसे कह सकते हो कि मेरे मुव्विकल ने कान काटे हैं। चश्मदीद गवाह ने उत्तर दिया,
"मैंने उसे कान को थूकते हुऐ देखा है।"
हमारे पास जीवाश्म हैं, जीवों की बीच की कड़ियां हैं,  तुलनात्मक दैहिक गठन संबंधी शारीरिक  रचनाऐं हैं, वन्शाणुवीय  साम्यताएं हैं - यह वह है जो विकासवाद ही हमें बता सकती है, यही उसका प्रमाण हैं।'
हांलाकि इसका अंग्रेजी का ही तर्जुमा ठीक बैठता है हिन्दी अनुवाद नहीं।

Creationism Pictures, Images and Photos

इस श्रंखला की अगली कड़ी मे हम बात करेंगे, बीसवीं शताब्दी के सबसे प्रसिद्ध मुकदमें की। यह अमेरिकी इतिहास के शर्मनाक मुकदमें की तरह भी जाना जाता है। हम चर्चा करेंगे कि क्या हुआ था उसमें, क्या था उसमें।


यह कार्टून मेरा बनाया नहीं है। फ्लोरिडा सिटिज़न फॉर साइंस (Florida Citizen for Science) ने लोगों के बीच विज्ञान को लोकप्रिय बनाने, उसे आसानी से समझाने के लिये स्टिक साइंस कंटेस्ट (Stick Science Contest) किया। मैंने यह वहीं से लिया है। इस कार्टून को प्रथम पुरुस्कार मिला है। चित्र को बड़ा करने के लिये उस पर चटका लगायें।

डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े
भूमिका।। डार्विन की समुद्र यात्रा।। डार्विन का विश्वास, बाईबिल से, क्यों डगमगाया।। सेब, गेहूं खाने की सजा।। भगवान, हमारे सपने हैं।। ब्रह्मा के दो भाग: आधे से पुरूष और आधे से स्त्री।। सृष्टि के कर्ता-धर्ता को भी नहीं मालुम इसकी शुरुवात का रहस्य।। मुझे फिर कभी ग़ुलाम देश में न जाना पड़े।। ऐसे व्यक्ति की जगह, बन्दरों से रिश्ता बेहतर है।। विकासवाद उष्मागति के दूसरे नियम का उल्लंघन करता है।। समय की चाल - व्यवस्था से, अव्यवस्था की ओर।। मैंने उसे थूकते हुऐ देखा है।।








About this post in Hindi-Roman and English
is chithi mein,vikaasvaad ke saboot ke baare mein charchaa kee gayee hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post talks about evidence in favour of evolution - the missing link. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.



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अंकल, क्या आप मुझे इसका पप दे सकते हैं

मैंने दस साल पहले जरूर कोई अच्छा काम किया होगा क्योंकि तभी ईश्वर ने मुझे मेरे जीवन का सबसे अच्छा उपहार दिया।

टॉमी का जन्म अप्रैल १९९९ में हुआ था। वह हमारे पास जून १९९९ में आया। हम उसे दिल्ली के एक डॉग केनल से ले कर आये थे। उसने न केवल हमारे जीवन में खुशियां भरी पर उन बहुत से लोगों के जीवन में भी जो हमारे अपने हैं हमसे करीब हैं और बहुत से अजनबी लोगों के भी। उसके पिल्ले जो कि अब स्वयं बड़े हो गये हैं, उनके जीवन में खुशियां बिखेर रहें हैं।

मैंने अपने जीवन में बहुत से नस्ल के कुत्ते पाले हैं देसी, एलसेशियन, लेब्रॉडर, पॉम, डोबरमैन, बॉक्सर पर टॉमी गोल्डन रिट्रीवर था, उसकी बात ही अलग थी। वह इन सबसे अलग क्लास में था। शायद इसलिये गोल्डन रिट्रीवर न केवल दुनिया में सबसे लोकप्रिय पारिवारिक कुत्ते माने जाते हैं पर रजिस्ट्रेशन के मुताबिक हैं भी। मालुम नहीं, मेरे किस जीवन का दोस्त था जो इतने दिन बाद मिला।



मेरे घर के सामने से अनगिनत कारें निकलती हैं पर मजाल कि वह उठे भी पर मेरी कार जब २०० मीटर दूर भी हो तो उसकी पूंछ का हिलना और भौंकना देखने काबिल होता था। अक्सर पहली बार हमारे घर में आये लोगों को अजीब लगता था कि एकदम से उसे क्या हो गया पर कुछ देर बाद समझ में आता था जब मेरी कार गेट के अन्दर आती थी।


मैं जब भी घर के अन्दर आता, वह हमेशा गेट पर पूंछ हिलाते और भौंकते ही मिलता था। लगता था कि वह दिन भर मेरे इंतजार में ही बैठा रहता था। मुन्ने की मां को हमेशा मुझसे जलन होती थी उसके आने पर पूंछ तो हिलाता था पर गेट पर पहुंच कर भौंकता नहीं था।

मैं कभी कभी मुन्ने की मां की कार लेकर भी बाहर जाता था पर वह न केवल कार की आवाज ही समझता था पर यह भी कि उसमें कौन है। यदि मैं उसमें हूं तो उसका बर्ताव वही होता था जो कि मेरी कार के लिये। शायद इसीलिये मुन्ने की मां को लगता था कि वह मेरे तीन प्रेमों में से एक था और इसीलिये क्रिकेट की नेटवेस्ट की सिरीस् जीतने के बाद वह भी हमारे साथ आइसक्रीम खाने गया था।


टॉमी का पहला काम था प्रतिदिन सुबह गेट से अखबार, पत्रिकायें लाना। वह पत्र, निमत्रंण कार्ड भी लाता था। अक्सर मैं डाकियों से कहता कि पत्र टॉमी को दे दें। वे उसे आश्चर्य से देखते फिर और भी आश्चर्य में डूबते जब वह चिट्ठी मुझे ला कर देता। हां उसे इसके लिये हमेशा एक बिस्किट मिलता।

मुझे याद है कि कुछ साल पहले हमारे कस्बे में लिओनिडस् उल्कापात (leonids meteor shower) सबसे अधिक था। हम रात को ढाई बजे नदी के किनारे इसे देखने गये थे। टॉमी भी हमारे साथ था। उसे साथ रखने में, मुझे विश्वास रहता था कि वह मुझे कुछ भी गड़बड़ी से बचा लेगा।



पिछले कुछ सालों को छोड़ कर, कस्बे में हुऐ सारे डॉग शो में, उसने भाग लिया। वह शो राष्ट्रीय स्तर का, या राज्य स्तर का, या फिर जिले स्तर का, उसे प्रत्येक में कोई न कोई पुरुस्कार मिला।

डॉग शो में, वह बच्चों के बीच वह सबसे लोकप्रिय होता था। बच्चे अक्सर मुझसे पूछते कि क्या वे उसे छू सकते हैं। मेरे जवाब होता कि न केवल वे उसे छू सकते हैं पर चूम भी सकते हैं। शायद ही कोई बच्चा होगा जिसने इसके गले में हाथ डाल कर इसे प्यार न किया हो। वे हमेशा मुझसे कहते,
'अंकल, क्या आप मुझे इसका पप दे सकते हैं।'
मेरा जवाब होता जरूर पर पहले तुम्हारी मां को उसके सेवा करने की जिम्मेवारी लेनी होगी। बहुत कम मांएं यह काम अपने हाथ में लेने के तैयार होती।

कुछ लोग, कुत्तों की मेटिंग पसन्द नहीं करते हैं। वे इसके लिये मना करते हैं। मुझे यह ठीक नहीं लगता। मेरे विचार से यह प्राकृतिक है। इसकी अनुमति देनी चाही।

टॉमी के पास, न केवल मेरे कस्बे से, पर दूर दूर की जगहों से लोग मेटिंग के लिये कुत्तियां ले कर आते थे। आप चाहें तो इसके लिये पैसा ले लें या फिर अपनी पसन्द का पिल्ला। हमें पैसे की जरूरत नहीं। ईश्वर ने हमें बहुत दिया। हमने हमेशा पप ही लिया। उसे, उन्हें उपहार में दिया जो हमारे दिल के पास हैं। इसी तरह से टॉमी उनके जीवन में वह खुशियां दे पाया जिसकी उन्हें आशा भी न थी।

टॉमी को गेंद लाना पसन्द था। आप गेंद फेंकते फेंकते थक जायेंगे पर वह गेंद लाते नहीं। कुछ साल पहले मुन्ना अमेरिका से उसके लिये एक गेंद फेंकने वाला लाया। इसमें गेंद को हाथ से छूना नहीं पड़ता गेंद उसमें फंसायी जा सकती है और आसानी से फेंकी जा सकती है। जब से वह आया तब से कुछ राहत आयी।


जिन कुत्तों के पूंछ में बाल होते हैं उनका पिछला भाग बहुत साफ नहीं रह पाता है। उसे खास तरह से साफ करना होता है क्योंकि बाल के कारण कुछ गन्दगी फंसी रह जाती है जिससे बिमारी हो जाती है। हम यह सफाई करते थे पर शायद ठीक प्रकार से नहीं। शायद यही कारण था कि उसके पिछले भाग में एक ट्यूमर हो गया था। हमने उसका ऑपरेशन करवाया था पर यह कुछ मुश्किल करता था। लेकिन वह ठीक था।

छः दिन पहले मुझे लगा कि उसे खड़े होने पर मुश्किल हो रही है। अगले दिन वह खड़ा नहीं हो पा रहा था। उसे मुश्किल होने लगी। हम उसे सुबह और शाम डाक्टर के पास ड्रिप लगवाने के लिये ले जाते थे। कल जब वह ड्रिप लगवा कर वापस आया तो तकलीफ में था। हमें लगा कि ड्रिप से उसे तकलीफ होती है और फिर ड्रिप न लगवाने की सोची।

टॉमी की हालत बिगड़ रही थी। वह उठ नहीं पाता था, इसलिये गन्दा भी हो गया और बदबू भी करता था। मैंने कल शाम को उसे पाउडर लगाया, ब्रश किया। वह महकने लगा, जंच रहा था, बिलकुल हीरो की तरह।

मैंने उसे, शाम को ही बाहर लॉन में लिटा दिया। रात को अन्दर किया। उस समय वह जीवित था। कुछ देर बाद, मैं उसे दूध पिलाने के लिये गया। उसके मुंह के चारो तरफ खून था। वह वहां चला गया था जहां से कोई वापस नहीं आता।

मैंने उसे पुनः साफ किया। रात में ही, हम ने उसे, घर में सामने की ओर, लॉन के बगल में, चूने और नमक के साथ गाड़ दिया। उसकी आखें फाटक और घर की तरफ - हमारी चौकीदारी करते हुऐ। वह हमेशा इसी तरह से बैठता था - एक नजर मुझ पर दूसरी नजर बाकी सारी जगह पर - कहीं कोई मुझ पर हमला न कर दे। मैं जब घर में होता, वह मेरा पीछा, साये की तरह करता।

कितनी यादें हैं कितने सुनहरे पल हैं, कितनी खुशियां है। मेरे लिये सब लिखना संभव नहीं।


हे ईश्वर, तुम्हें धन्यवाद कि तुमने मुझे ऐसा उपहार दिया।

अलविदा मेरे मित्र, मित्रता दिवस पर तुम्हें सलाम। तुम हमेशा मेरे जहन में, मेरी यादों में रहोगे। मेरे साथ इतने सुनहरे पल बिताने का शुक्रिया।

पुनः हमने टॉमी की याद में, उसकी कब्र के दो तरफ, बेला और काजू का पेड़ लगाया है ताकि आने वाले समय में, उसकी महक और याद, हमेशा रहे।
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