'इंटेलिजेन्ट डिज़ाईन' - सृजनवादियों का नया पैंतरा

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय से दो बार हार जाने के बाद भी मज़हबी कट्टरवादियों ने हार नहीं मानी। उन्होनें अपना पैंतरा बदल दिया। इस चिट्ठी में उनकी इस चाल और उस पर टैमी किट्ज़मिलर बनाम डोवर एरिया स्कूल डिस्ट्रिक्ट मुकदमें में हुऐ फैसले की चर्चा है। 
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें। यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम लिखा है वहां चटका लगायें। इन्हें डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।

मज़हबी कट्टरवादियों ने १९८९ में एक पुस्तक प्रकाशित की। इसका नाम 'ऑफ पांडास्  एण्ड पीपल' है। इसमें सिद्वान्त तो सृजनवाद का ही है पर सृजनवाद की जगह 'इंटेलिजेन्ट डिज़ाईन' (Intelligent Design) शब्द का प्रयोग किया गया है। इन लोगों ने स्कूलों को निम्न तरह की यह  नीति निर्णय लेने के लिए बाध्य किया,
'The Pennsylvania Academic Standards require students to learn about Darwin’s Theory of Evolution and Case eventually to take a standardized test of which evolution is a part.
Because Darwin’s Theory is a theory, it continues to be tested as new evidence is discovered. The Theory is not a fact. Gaps in the Theory exist for which there is no evidence. A theory is defined as a well-tested explanation that unifies a broad range of observations.
Intelligent Design is an explanation of the origin of life that differs from Darwin’s view. The reference book, Of Pandas and People, is available for students who might be interested in gaining an understanding of what Intelligent Design actually involves.
With respect to any theory, students are encouraged to keep an open mind. The school leaves the discussion of the Origins of Life to individual students and their families. As a Standards-driven district, class instruction focuses upon preparing students to achieve proficiency on Standards-based assessments.'

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'स्कूल में   डार्विन का विकासवाद का सिद्धांत पढ़ाया जा सकता है। लेकिन शिक्षक उसको पढ़ाने के पहले विद्यार्थियों को बतायें कि यह केवल सिद्धांत है और इस सिद्धांत का कोई तथ्य नहीं है।
इंटेलीजेंट डिज़ाइन सिद्धांत भी प्राणियों की उत्पत्ति के बारे में बताता है और यह डार्विन के विकासवाद से भिन्न है। इस बारे में 'ऑफ  पांडास एण्ड पीपल' नामक पुस्तक  विद्यार्थियों  के लिए उपलब्ध है जो इस सिद्वान्त के बारे में बताती है।
विद्यार्थियों से कहा जाता है कि वे अपने मस्तिष्क को खुला रखे।  इस बारे में, विद्यालय विद्यार्थियों को उनके एवं परिवार के विवेक पर छोड़ते है।'

यह नीति बहुत सारे स्कूलों में लागू कर दी गयी।  कुछ अभिभावकों ने इस नीति निर्णय को न्यायालय के समक्ष चुनौती दी।

दो बेटियों की मां, टैमी किट्ज़मिलर २६ सितम्बर २००५ में, हैरिसबर्ग पैनिसलवेनिया के न्यायालय से बाहर आती हुईं - चित्र कैरलिन कैस्टर/ एपी फोटो Carolyn Kaster/ AP Photo


अमेरिका के पेन्सिलवेनिया राज्य के परीक्षण न्यायालय ने, टैमी किट्ज़मिलर बनाम डोवर एरिया स्कूल डिस्ट्रिक्ट मुकदमें में, दिनांक २० दिसम्बर,२००५ को अपना फैसला देते हुऐ घोषणा की,
'A declaratory judgement is issued in favour of Plaintiff ... that Defendant's [School's] policy violates the First Amendment of the Constitution of the United States and Article 1& 3 of the Constitution of the Commonwealth of Pennsylvania.
... Defendants are permanently enjoined from maintaining ID Policy in any school within Dover Area District.'  
यह नीति अमेरिका के प्रथम संशोधन का उल्लघंन करती है, और असंवैधानिक है।
विपक्ष पक्ष को आदेशित किया जाता है कि वे इस नीति को डोवेर क्षेत्र के किसी भी स्कूल में  लागू न करें।
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नवम्बर २००५ में डोवर स्कूल बोर्ड़ के सदस्यों का चुनाव हुआ। इस  चुनाव में इंटेलीजेन्ट डिज़ाइन नीति के पक्ष में वोट दिये जाने  वाले सारे सदस्य नहीं चुने गये। नये सदस्यों के मुताबिक यह नीति  ठीक नहीं थी। उन्होनें इसे ठुकरा दिया।


क्या कट्टरवादियों ने हार मान ली या कुछ नया राग छेड़ दिया - यह अगली बार। 

डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े 
भूमिका।। डार्विन की समुद्र यात्रा।। डार्विन का विश्वास, बाईबिल से, क्यों डगमगाया।। सेब, गेहूं खाने की सजा।। भगवान, हमारे सपने हैं।। ब्रह्मा के दो भाग: आधे से पुरूष और आधे से स्त्री।। सृष्टि के कर्ता-धर्ता को भी नहीं मालुम इसकी शुरुवात का रहस्य।। मुझे फिर कभी ग़ुलाम देश में न जाना पड़े।। ऐसे व्यक्ति की जगह, बन्दरों से रिश्ता बेहतर है।। विकासवाद उष्मागति के दूसरे नियम का उल्लंघन करता है।। समय की चाल - व्यवस्था से, अव्यवस्था की ओर।। मैंने उसे थूकते हुऐ देखा है।। यदि विकासवाद जीतता है तो इसाइयत बाहर हो जायगी।। विकासवाद पढ़ाना मना करना, मज़हबी निष्पक्षता का प्रतीक नहीं।। सृजनवाद धार्मिक मत है विज्ञान नहीं है।। 'इंटेलिजेन्ट डिज़ाईन' - सृजनवादियों का नया पैंतरा।।


About this post in Hindi-Roman and English
is chitthi mein Tammy Kitzmiller V Dover Area School District mukdme kee charchaa hai. ismen court ne oos neeti ko gairkanoonee ghoshit kar diya jismen intelligent design ko pdhaane ka nirnay liya gayaa thaa. yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post is about Tammy Kitzmiller V Dover Area School District where the court has declared the policy to teach intelligent design as unconstitutional. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक चिन्ह
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भारत में समुद्र तट सार्वजनिक होते हैं न कि निजी

समुद्र तट सार्वजनिक होते हैं। इस चिट्ठी में  इस चिट्ठी में त्रिवेन्दम के समुद्र तट के साथ, इसी की चर्चा है।



त्रिवेन्दम में हम लोग केटीडीसी के समुद्र होटेल में ठहरे थे। वहां पहुंच कर हम लोगों ने चाय पी और नीचे समुद्र तट पर घूमने चले गये। इस तट का नाम ही ‘समुद्र तट‘ है । यहां पर सूर्यास्त हो रहा था - बहुत दृश्य सुन्दर था। 



हम लोगों ने यह सोचा कि पूरे तट का एक नज़ारा ले लिया जाए। हम लोग जब एक तरफ आगे जाने लगे तो एक जगह, एक गार्ड,  हम लोगों को जाने से रोकने लगा। वहां पर कोई प्राइवेट होटल था। वह उसी का गार्ड था। उसने हमसे कहा,
‘यह समुद्र तट का हिस्सा केवल उसके होटल के अतिथि के लिए है सबके लिए नहीं  आप  लोग  नहीं जा सकते हैं।‘
मैंने उससे रौबीली आवाज़ में कहा,
‘भारत में कोई भी समुद्र तट प्राइवेट नहीं है। सारे समुद्र तट सरकारी और सार्वजनिक है। हां कुछ सुरक्षा की दृष्टि से  कुछ तट सार्वजनिक तौर पर नहीं  खुले है। तुम हमें यहां घूमने से नहीं रोक सकते हो।
हाँ यह बात अलग है कि हम लोग कोई अश्लील तरीके का कपड़ा पहने या कोई अश्लील काम को करें, तो रोक सकते हो। लेकिन हम लोग न अश्लील कपड़े पहने हुए हैं और न ही अश्लील हरकत कर रहे है। इसलिए हमें रोकना एकदम गलत है। तुम अपने मैनेजर को बुलाकर लाओ या फिर मुझे उसके पास ले चलो। मैं उसे समझा देता हूं।'
इतना सुनने के बाद वह थोड़ा सा घबरा सा गया। उसने कहा अच्छा-अच्छा आप लोग आगे जा सकते है। हम लोग आगे तक घूमने गये। वहां घूमते हुऐ उसकी बात समझ में आयी। 

उस होटल में बहुत सारे विदेशी पर्यटक भी थे। यह लोग भारतियों से बहुत कम कपड़े पहने हुए थे और धूप का आनन्द ले रहे थे या नहा रहे थे। सारे भारतीय उन्हीं की तरफ देख रहे थे। भारत के पुरूष भी जो नहा रहे थे वह भी ठीक तरह के कपड़े पहनकर नही नहा रहे थे।  मुझे ही देखने में अजीब लग रहा था तो विदेशियों को देखने में  अजीब लगेगा ही। किसी को भी यह हरकत परेशान करेगी। इसीलिए वह मना कर रहा था।


हम लोग दो साल पहले गोवा गये थे वहां पर 'सिटा दे गोवा' नामक होटल में ठहरे थे। यह बहुत सुन्दर होटल है पर इसने अपनी इमारत इस तरह से बना ली है कि इसके सामने का समुद्र तट इन्हीं का हो गया है। इस इमारत को भी उन्होंने गैर कानूनी तौर से बनाया है। इस बारे में वहां एक लोकहित याचिका हुई। जिसमें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इमारत तोड़ने का आदेश हो गया पर गोवा सरकार ने इसे बचाने के लिए अध्यादेश जारी कर दिया है। इसलिए आजकल वहां बवाल मचा है। इस विषय पर अधिक जानकारी आप डाउन टू अर्थ नामक पत्रिका के लेख में पढ़ सकते हैं। डाउन टू अर्थ एक अच्छी पत्रिका है। मैंने इसके और पर्यावरण पर कुछ अन्य पत्रिकाओं के बारे में यहां लिखा है। 

समुद्र तट पर घूमते हुए वहाँ पर कुछ लोगों ने मुझसे पूछा क्या नाव पर घूमना पसन्द करूंगा। मैंने कहा,
'इस समय तो कुछ अंधेरा हो रहा है इसलिए आज तो नहीं पर कल घूमना पसन्द करूंगा। लेकिन, इसके लिये आपको कितने पैसे देने होंगे।'
मेरा इतना ही कहना था कि मुन्ने की मां मुझसे कहने लगी, 
‘तुम नाव पर नहीं जाओगे। यदि तुम्हें नाव पर घूमने के लिए जाना है तो तुम अकेले आया करो या फिर मुझे अपने साथ न लाया करो।'
इतने में उस व्यक्ति ने जवाब दिया,
'नाव में एक बार घूमने पर चार सौ पचास रूपये लगेगा और कल सुबह साढ़े नौ बजे से सैर करना शुरू होगा।'
हम जब वहां से चलने लगे, तो मुन्ने की मां ने फिर से कहा,
'चाहे जो भी हो जाए, लेकिन, तुम नाव पर घूमने नहीं जाओगे।'
मैंने उसका मन रखने के लिए कहा, 
'मैं तो उससे केवल पैसा पूछ रहा था, मैं घूमने नहीं जा रहा हूं।'
मैंने सोचा कि अगले दिन अकेले आऊँगा और चुपके से बिना बताये घूमने चला जाऊँगा लेकिन यह हो न सका। हम उसके बाद बहुत व्यस्त रहे।

अगली बार बात करेंगे इटालियन सुन्दरी, सिलविया की।

कोचीन-कुमाराकॉम-त्रिवेन्दम यात्रा
 क्या कहा, महिलायें वोट नहीं दे सकती थीं।। मैडम, दरवाजा जोर से नहीं बंद किया जाता।। हिन्दी चिट्ठकारों का तो खास ख्याल रखना होता है।। आप जितनी सुन्दर हैं उतनी ही सुन्दर आपके पैरों में लगी मेंहदी।। साइकलें, ठहरने वाले मेहमानो के लिये हैं।। पुरुष बच्चों को देखे - महिलाएं मौज मस्ती करें।। भारतीय महिलाएं, साड़ी पहनकर छोटे-छोटे कदम लेती हैं।। पति, बिल्लियों की देख-भाल कर रहे हैं।। कुमाराकॉम पक्षीशाला में।। क्या खांयेगे - बीफ बिरयानी, बीफ आमलेट या बीफ कटलेट।। आखिरकार, हमें प्राइवेट और सरकारी होटल में अन्तर समझ में आया।। भारत में समुद्र तट सार्वजनिक होते हैं न की निजी।। 


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Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. his will take you to the page where file is. Click where ‘Download’ and there after name of the file is written.)
  • सृजनवादियों का नया पैंतरा और न्यायालय का फैसला: ►
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यात्रा विवरण पर लेख चिट्ठे पर अन्य चिट्ठियां



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samudra tat saarvjanik hote hain. is chitthi mein isee kee charchaa trivandum ke smudra tat ke sandarbh mein kee gayee hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.


Beaches in India are public. This post explains it in context of a beach in Trivandum.  It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
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