अन्तरजाल पर कानून में टकराव

अन्तरजाल में देशों की सीमायें नहीं हैं। इस कारण देशों के कानून में टकराव हो रहा है। श्रंखला - 'अंतरजाल की मायानगरी में' की इस कड़ी में, इसी की चर्चा है। इसे आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें। यह आपको इन फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें। इन्हेंं डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।

मैंने 'अन्तरजाल की माया नगरी' श्रंखला में अन्तरजाल पर उठ रहे मुद्दों के बारे में चर्चा की थी। यह श्रंखला बहुत पहले समाप्त हो गयी थी। उसके बाद मुझे लगा कि इसके भविष्य के बारे में कुछ लिखना चाहिये। इसलिये मैने दो चिट्ठियां वेब २.० और सॅमेंटिक वेब पर लिखीं।


देशों के कानून अलग अलग हैं। इस कारण अन्तरजाल पर उठ रहे मुद्दों के हल में भी टकराव हो रहा है। मेरे विचार से, इस पर भी कुछ चर्चा, इस श्रंखला में होनी चाहिये इसी लिये यह चिट्ठी प्रकाशित कर रहा हूं।


कानून किसी भी जगह और समय के प्रतिबिम्ब होते हैं। यह उस जगह और समय की नैतिकता के प्रतीक हैं। हांलाकि कानून कितना कारगर है यह बात वहां के कानून के पालन पर निर्भर करती है। 

देशों में, मोटे तौर पर कानून एक जैसे होते हैं पर कुछ मूलभूत अन्तर के कारण, कानून में भी अन्तर होता है। वेब ने, देशों की सीमाओं को समाप्त कर दिया है। इसलिये जहां कानून में अन्तर है वहां टकराव की स्थिति पैदा हो गयी है। अभी तक इस समस्या का हल, न तो संतोषजनक रूप से निकला है, और न ही कोई रास्ता समझ में आ रहा है। आइये इसके कुछ उदाहरण देखें।


अश्लीलता देशों की नैतिकता पर निर्भर है। देशों में अश्लीलता के अलग अलग मापदन्ड हैं। बहुत से देशों में जिसे अश्लील नहीं कहा जाता उसे दूसरे देशों में अश्लील कहा जाता है। किस भी देश में स्थित वेबसाइट की सामग्री को दुनिया के किसी और देश में देखा जा सकता है। यदि उस सर्वर की वेबसाइट कुछ ऐसा साहित्य है जो कि उस देश के कानून के मुताबिक अश्लील न हो पर दूसरे देश के कानून के मुताबिक अश्लील हो तो क्या दूसरे देश में उस साहित्य को सर्वर पर डालने वाले को जेल भिजवाया जा सकता है।


यही बात मानहानि (defamation) के कानून में लागू होती है। जो समाग्री एक देश में कानूनी है पर दूसरे देश में गैरकानूनी है। सवाल यह उठता है कि उस सामग्री को किसी दूसरे देश में, जिसके कानून के अन्दर वह गैर कानूनी है, कैसे रोका जाय।


द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद, जर्मनी और फ्रांस में नाज़ी साहित्य या उनके चिन्ह या उनकी बड़ाई करने वाले साहित्य के बेचने पर मनाही है।

नाज़ी पार्टी के शासन के समय जर्मनी का राष्ट्रीय चिन्ह

याहू एक प्रसिद्ध वेबसाइट है।
Image representing Yahoo! as depicted in Crunc...चित्र क्रंच बेस के सौजन्य से
हर देश में इसकी सहायक (subsidiary) कंपनी भी पंजीकृत है।  याहू वेबसाइट बहुत सारी सेवायें भी देती है जसमें निलामी भी है। यह नाज़ी चिन्हों की निलामी भी करती है। यह बात अमेरिका में तो गैरकानूनी नहीं, पर फ्रांस और जर्मनी में है।

याहू फ्रांस, याहू की सहायक कम्पनी है जो कि फ्रांस देश में पंजीकृत है। यह वहां के कानून से बाध्य है। यह नाज़ी चिन्ह या नाज़ियों की बड़ाई करने वाला साहित्य नहीं बेच सकती है। लेकिन सवाल यह है कि याहू वेबसाइट जो अमेरिका के सर्वर पर स्थित है और अमेरिका में पंजीकृत है जिसके कानून में यह सेवा गैरकानूनी नहीं है को क्या फ्रांस के न्यायालय या सरकार ऐसा करने से मना कर सकती है कि वह ऐसा कार्य न करे क्योंकि यह वेबसाइट फ्रांस में भी देखी जा सकती है, जहां यह गैरकानूनी है। 

 
नाज़ी पार्टी का बैज़

फ्रांस के नागरिक स्वतंत्रता (civil liberty) की दो संस्थाओं ने फ्रांस में याहू पर मुकदमा ठोका। फ्रांसीसी न्यायलय ने निषधाज्ञा जारी कर याहू को इस तरह की पुस्तकें तथा चिन्ह बेचने से मना किया और आज्ञा न मानने पर हर्ज़ाना लगाया। याहू ने इस फैसले के खिलाफ अपील तो नहीं प्रस्तुत की पर अमेरिकन न्यायलय में इस बात का मुकदमा चलाया कि
  • वे, यह कार्य वे अमेरिका में कर रहे हैं;
  • जहां के कानून के अन्दर यह गैर कानूनी नहीं है; 
  • इसलिये इस फैसले शून्य घोषित किया जाय।


परीक्षण न्यायालय ने इस फैसले को शून्य घोषित कर दिया। फ्रांस की संस्थाओं ने इसके विरुद्ध अपील प्रस्तुत की जो २-१ से स्वीकार कर ली गयी पर बाद में यह फैसला पुननिरीक्षण के लिये पूरी अपीली न्यायालय के समक्ष पेश हुआ। ११ न्यायधीशों ने मुकदमे सुना और तय किया (433 F.3d 1199) कि,
'An eight-judge majority ... holds ... that the district court properly exercised specific personal jurisdiction over defendants ... A three-judge plurality of the panel concludes, as explained in Part III of this opinion, that the suit is unripe for decision ... When the votes of the three judges who conclude that the suit is unripe are combined with the votes of the three dissenting judges who conclude that there is no personal jurisdiction ... there are six votes to dismiss Yahoo!’s suit.


We therefore REVERSE and REMAND to the district court with instructions to dismiss without prejudice.'


इस फैसले में मुख्यतः अमेरीकी अपीली न्यायालय ने बहुमत द्वारा इस बात पर फैसला देने से इंकार कर दिया कि क्या अमेरीकी न्यायालय, फ्रांसीसी न्यायालय का फैसला रद्ध किया जा सकता है। तीन न्यायधीशों के मुताबिक यह सवाल अभी उठा नहीं है और यह मुकदमा परिपक्व नहीं हुआ है। क्योंकि फ्रांसीसी न्यायालय का फैसला अभी तक अमेरिका में लागू करने के लिये नहीं आया है। तीन न्यायधीशों के मुताबिक न्यायालय को विपक्ष पर निर्णय देने के लिये व्यक्तिगत अधिकार नहीं पाप्त है। इस लिये न्यायालय ने इस मुकदमे को परीक्षण न्यायालय के पास इसे यह कहते हुऐ खारिज करने के लिये भेज दिया कि यह याहू के अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं रखेगा।


कानून में यह स्पष्ट नहीं है कि इस परस्थिति में क्या किया जाय – शायद इसका हल भविष्य में ही छिपा है। शायद, 
  • सारे देशों को एक कानून पर सहमति बनानी होगी, या
  • फ्रांसीसी न्यायालय को याहू को निषेधाज्ञा न देकर, फ्रांस में स्थित, इंटरनेट की सेवायें देने वाली कंपनियों को यह आज्ञा देनी चाहिये थी, या
  • कोई अन्य रास्ता (जो मुझे समझ में नहीं आता) वह ढ़ूढा जाय।
देखिये भविष्य इस विषय में किस तरफ करवट लेता है।


अंतरजाल की मायानगरी में
टिम बरनर्स् ली।। इंटरनेट क्या होता है।। वेब क्या होता है।। वेब २.०।। सॅमेंटिक वेब क्या है और विकिपीडिया का महत्व।। लिकिंग, क्या यह गलत है।। चित्र जोड़ना - यह ठीक नहीं।। फ्रेमिंग भी ठीक नहीं।। बैंडविड्थ की चोरी - क्या यह गैर कानूनी है।। बैंडविड्थ की चोरी - कब गैरकानूनी है।। डोमेन नाम विवाद क्या होता है।। समान डोमेन नाम विवाद नीति, साइबर और टाइपो स्कवैटिंग।। की वर्ड और मॅटा टैग विवाद।। गोलमाल है भाई गोलमाल।। अन्तरजाल पर कानून में टकराव।। समकक्ष कंप्यूटर के बीच फाइल शेयरिंग।। शॉ फैनिंग, नैपस्टर सॉफ्टवेयर, और उस पर चला मुकदमा।। कज़ा केस।। ग्रॉकस्टर केस।। ग्रॉकस्टर केस में अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का फैसला।।

इस चिट्ठी के दोनो चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से हैं।

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(सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।: Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. Click where 'Download' and there after name of the file is written.)
यह ऑडियो फइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप -
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में - सुन सकते हैं।
बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।













About this post in Hindi-Roman and English is post per anterjaal mein deshon ke kanoon mein takraav kee charchaa hai. yeh hindi (devnagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

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