प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ?

मां मरियम और जोसेफ नाज़रेथ में रहते थे पर प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में हुआ। ऐसा क्यों हुआ, यही इस बार चर्चा का विषय है।

प्रभू ईसा को देख, चकित होते हुऐ चरवाहे

हमारे बचपन में, घर में विज्ञान की चर्चा होती थी पर पूजा-पाठ या रिलिज़न (religion) सम्बन्धित चर्चा नहीं। यह आज भी सच है। मैं कभी भी किसी मिशनरी या फिर अंग्रेजी स्कूल में नहीं पढ़ा। मुझे बाईबिल के बारे में कुछ नहीं मालुम था। कम से कम यह तो बिलकुल नहीं कि, प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में हुआ था।

मैंने कुछ समय पहले सांख्यिकी के ऊपर चर्चा की थी और 'आंकड़े गलत बताते हैं' चिट्टी पर उस विषय की बेहतरीन पुस्तकों की भी चर्चा की थी। इसमें एक पुस्तक है Facts from Figures by M.J. Moroney. इसका पहला अध्याय है Statistics undesirable.

योजना बनाने वाले, अक्सर किसी खास व्यक्ति के लिये हजारों लोगों को तकलीफ में डाल देते हैं - आज भी सच है:-)

यह अध्याय, सांख्यिकी के पुराने समय होने वाले प्रयोगों की चर्चा करती है। उसका दूसरा पैराग्राफ, कुछ इस प्रकार है,
'We are reminded of the ancient statisticians every Christmas when we read that Caesar Augustus decreed that the whole world should be enrolled, each man returning to his own city for registration, Had it not been for the statisticians Christ would have been born in the modest comfort of a cottage in Nazareth instead of in a stable at Bethlehem. The story is a symbol of the blindness of the planners of all ages to the comforts of the individual. They just didn't think of the overcrowding there would be in a little place like Bethlehem.'
हर साल बड़ा दिन, हमें उस प्राचीन काल के सांख्यकीविद् की याद दिलाता है। सीजर ऑगस्टस {२३.९.६३ ईसा-पूर्व (BC) – १९.८.१४ ईसा-बाद (AD)} ने आज्ञा निकाली थी कि सारे दुनिया के लोगों की जनगणना होगी और अपना पंजीकरण कराने सब लोगों को वापस अपने शहर आना होगा। यदि वह सांख्यकीविद् न होता, तो प्रभू ईसा, नाजरेथ में अपने आरामदेह घर में पैदा होते न कि बेथलहम के अस्तबल में। यह कहानी योजना बनाने वालों की कमियों को दर्शाती है जो अक्सर किसी खास व्यक्ति के लिये हजारों लोगों को तकलीफ में डाल देते हैं। योजना बनाने वालों ने इतना
भी नहीं सोचा कि बेथलहम जैसी छोटी जगह में इतनी भीड़ हो जायेगी।

सीजर ऑगस्टस {२३.९.६३ ईसा-पूर्व (BC) – १९.८.१४ ईसा-बाद (AD)} जिसने जनगणना की आज्ञा निकाली थी

मां मरियम और जोसेफ नाजरेथ में रहते थे। जोसेफ वेथलेहम के रहने वाले थे। आगस्टस की आज्ञा के कारण उन्हें वेथलहम आना पड़ा। वहां भीड़ के कारण उन्हें किसी भी सराय में जगह नहीं मिली। इसलिये उन्हे अस्तबल में ही रूकना पड़ा। वहीं प्रभू ईसा का जन्म हुआ।

यह पुस्तक प्रभू ईसा के जन्मस्थल को अस्तबल बताती है। जहां तक मुझे मालुम है कि उस जगह भेड़, बकरी रहते थे। क्या भेड़शाला या फिर गौशाला कहना ठीक होगा?

मां मरियम का मायका, बेथलेहम में नहीं था वहां तो उनका ससुराल था। कैसा संयोग, यदि भगवान कृष्ण ने जेल में जन्म लेना ठीक समझा तो प्रभू ईसा ने अस्तबल में।

यह जनगणना ६ ईसा-बाद (AD) में हुयी थी। यानी जो साल प्रभू ईसा का जन्म माना जाता है उसके छ: साल बाद। प्रभू ईसा के जन्म के समय निकले तारे के कारण, कुछ लोग कहते हैं कि प्रभू ईसा का जन्म ३ या फिर ७ ईसा-पूर्व (BC) में हुआ था यानि उनके जन्म के कई साल पहले। हम आने वाली चिट्ठियों में इसकी भी चर्चा करेंगे।

प्रभू ईसा का जन्म किस साल हुआ किस दिन हुआ – इसके बारे में कोई निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। यह उतना ही प्रमाणिक है जितना कि भगवान राम का जन्म दिन। जहां तक मैं समझता हूं भगवान राम, कृष्ण, ईसा नाम के महापुरूष हुए हैं अन्यथा उनके किस्से इतना प्रचलित न होते पर उनके जन्म के बारे में ठीक समय तय कर पाना मुश्किल है।

कुछ समय पहले, हिन्दी चिट्ठाजगत में प्रभू ईसा के जन्म दिन, २५ दिसंबर को, बड़ा दिन कहने पर कुछ इतराज़ किया गया था। अगली बार इसी पर चर्चा करेंगे कि इसे बड़ा दिन क्यों कहा गया?

बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां
भूमिका।। प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ?।।

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इस चिट्ठी के चित्र विकिपीडिया से हैं और ग्नू स्वतंत्र अनुमति पत्र की शर्तों के अन्दर प्रकाशित हैं।


इस चिट्ठी में चर्चा का विषय है कि प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ? यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

is post per charcha hai ki 'jesus christ ka janm kyon Bethlehem men hua thaa'. yah {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post explains why was Jesus Christ was born in Bethlehm? It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


सांकेतिक शब्द

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फिल्म - सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक सत्य कथा पर आधारित है

वियाना में मुझे एक कॉन्वेन्ट में ठहरना था। इसी कारण, बर्लिन से वियाना जाते समय, मुझे ९६० के दशक में देखी फिल्म, सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक (Sound of Music) की याद आयी। यह फिल्म १९६० के दशक में बनी थी। मैंने इसे तभी देखा था। यह आज तक की बनी संगीत-मय फिल्मों में, सबसे प्रसिद्ध है। इसे पांच ऐकेडमी पुरुस्कार मिलें हैं। यह मारिया नामक लड़की की सत्य कथा पर आधारित है।

मारिया का पूरा नाम मारिया फॉन ट्रैप (शादी के पहले कुक्षेरा) {Maria von Trapp (nee Kutschera)} था। वह वियाना में रहने वाली एक अनाथ लड़की थी। वियाना से वह सॉल्सबर्ग (Salsburg) के एक कॉन्वेंट में नन बनने के गयी। वहां से उसे, विधुर नेवल कमांडर के घर, सात बच्चों की देखभाल करने के लिये, भेजा गया। जहां दोनो में प्रेम हो गया और उन्होने शादी कर ली। वे द्वितीय विश्व युद्ध के समय ऑस्ट्रिया से भाग कर अमेरिका चले गये। मारिया ने बाद में अपनी जीवनी 'द स्टोरी ऑफ ट्रैप फैमली सिंगरस् (The Story of the Trapp Family Singer's) नाम से लिखी।

सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक, फिल्म मारिया की पुस्तक 'द स्टोरी ऑफ ट्रैप फैमली सिंगरस्' पर आधारित है। फिल्म की मूलभूत कहानी तो पुस्तक से ली गयी है पर फिल्मी मसाले के लिये, उसमें बदलाव किया गया है। वास्तव में, मारिया द्वितीय विश्व युद्ध के पहले ही कमांडर के घर बच्चों को देखने गयी थी और उसकी शादी भी पहले हो गयी थी पर यह फिल्म में यह सब द्वितीय विश्व युद्ध के समय का दिखाया गया है। हांलाकि वे द्वितीय विश्व युद्ध के समय ही वहां से भागे थे।

नन की भूमिका में जूलिया एंड्रयूस्

फिल्म में मारिया की भूमिका, जूलिया एंड्रयूस् कलाकारा ने निभाया है। इस फिल्म का गाना 'डो रे मी ... डो अ डीयर, अ फीमेल डियर, रे अ ड्रॉप ऑफ गोल्डन सन ' बहुत लोकप्रिय गीत हुआ करता था।



यह कथा सॉल्सबर्ग की है और फिल्म की शूटिंग भी सॉल्सबर्ग में हुई है। यह एक बेहतरीन फिल्म है। यदि आपने नहीं देखी है तो अवश्य देखें।

फिल्म से, सॉल्सबर्ग का एक दृश्य

सॉल्सबर्ग, वियाना से दूर है। वहां एक दिन में जाकर वापस नहीं आया जा सकता था इसलिये वहां नहीं गया। जिस जगह पर इस फिल्म की शूटिंग हुई है वहां पर कन्वेन्शन सेन्टर बन गया है और अन्तर-राष्ट्रीय सम्मेलन होते हैं। क्या मालुम कभी वहां सम्मेलन में जाने का मौका मिल जाय तब ही इस फिल्म की यादों को पूरा कर लूंगा।

इसी फिल्म पर आधरित हिन्दी की फिल्म परिचय है। इसमें भारतीय परवेश के अनुसार, बदलाव किये गये हैं। इस फिल्म की मुख्य भूमिका में अशोक कुमार प्राण (गलती सुधार: आभार ई-मेल श्री पीयूष मेहता - सूरत ३९५००१) जीतेन्द्र और जया भादुड़ी हैं। परिचय फिल्म का गाना 'सारे के सारे, गामा के संग' सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक गीत 'डो रे मी ... डो अ डीयर' पर आधारित है। इसे भी आप सुन सकते हैं।



मुझे वियाना में एक कॉन्वेंट में ठहरना था। वहां पर सिस्टर सीग्रेड ने मेरा ख्याल रखा। अगली बार, उन्हीं के बारे में।

वियाना यात्रा
मैं पहुंच रहा हूं।। फिल्म - सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक सत्य कथा पर आधारित है।।



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यह पोस्ट 'सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक' नामक फिल्म और 'द स्टोरी ऑफ ट्रैप फैमली सिंगरस्' नामक पुस्तक की समीक्षा है। यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

yah post 'Sound of Music' naamak film aur 'The Story of the Trapp Family Singer's' pustak kee smeekshaa hai. yah hindee {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post is review of the picture 'Sound of Music' and book 'The Story of the Trapp Family Singer's'. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


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